पूना समझौता 1932- (Poona Pact 1932)


पूना समझौता महात्मा गाँधी और डॉ. भीम राव आंबेडकर के मध्य 1932 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री मेक्डोनाल्ड ने साम्प्रदायिक घोषणा द्वारा हरिजनों के लिए अलग  से निर्वाचन की व्यवस्था की इसका गांधीजी ने विरोध किया और आमरण अनशन प्रारम्भ किया। 20 अगस्त 1932 को आंबेडकर तथा गांधीजी के बीच पूना में समझौता हुआ इसे पूना समझौता कहा जाता है। इसके द्वारा केंद्रीय विधान मण्डल में हरिजनों के लिए 18 प्रतिशत सीटो  आरक्षण तथा उनकी शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता की व्यवस्था की गयी। सरकारी नोकरियो में भी उनके लिए उचित प्रतिनिधित्व की व्यवस्था की गयी। इस सम्पूर्ण प्रक्रिया को ही पूना समझौता कहाँ जाता है।

पालिस आन्दोलन तमिलनाडु (Movement of the Pallis)

पालिस आन्दोलन तमिलनाडु में चलाया गया एक अनुखा आंदोलन था। ये आंदोलन उत्तरी तमिलनाडु में रहने वाली पालिस नामक निम्न जाति के लोगो के द्वारा चलाया गया था। तमिलनाडु के उत्तरी भाग में पालिस जाती के लोग रहते थे। इन लोगो ने अपने आप को खुद ही सन 1871 में क्षत्रिय कहना शुरू कर दिया था। ये लोग क्षत्रियो की भाती रहने लगे थे। और इन्होंने क्षत्रियो की भांति रहना शुरू कर दिया था।  उन्होंने स्वयं को वाणिंया कुल क्षत्रिय कहा। इन लोगो ने उच्च जातियो की नक़ल करते हुए विधवा पुनर्विवाह पर प्रतिबन्ध लगा दिया था। इस आंदोलन को पालिस आंदोलन के नाम से जाना जाता है।

एज़वा आन्दोलन - Ezhava Movement

भारत में अछुतो को उनके अधिकार दिलाने के लिए अनेक प्रकार के आन्दोलनों को चलाया गया जिनमे से एक है एज़वा आन्दोलन। एज़वा आन्दोलन के द्वारा केरल की एज़वा अछूत जाति ने ब्राह्मणों की सम्प्रभुता पर एक बड़ा आक्रमण किया और नानु असन (जिनको नारायण गुरु के नाम से भी जाना जाता है) के नेतृत्व में 20वी शताब्दी के प्रारम्भ में मंदिरो में अछुतो के प्रवेश के लिए मांग की और स्वयं का संस्कृतिकरण किया बाद में एज़वा साम्यवादी विचारधारा के जबर्दस्त समर्थक हो गए।

दारुल उल्मा इस्लामी विश्वविद्यालय , देवबन्द (उत्तर प्रदेश) - The Darul Uloom Deoband

दारुल उलूम भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के सहारनपुर जिले के देवबन्द नामक शहर में स्थित है। दारुल उलूम एक इस्लामी स्कूल है। इस एशिया का सबसे बड़ा मन्दरसा भी माना जाता है। इस्लामी दुनिया में दारुल उलूम का विशेष स्थान है। देवबन्द का दारुल उलूम एक विश्विधायालय ही नहीं  बड़ी विचारधारा है। इस विचार धारा से  प्रभावित मुसलमानो को देवबन्दी के नाम से जाना जाता है। 
एक मुसलमान उलूम ने जो प्राचीन मुस्लिम विद्या के अग्रणी थे। उन्होंने देवबन्द आंदोलन चलाया। इस आंदोलन के दो मुख्य उद्देश्य थे मुसलमानो में कुरान और हदीस की शुद्ध शिक्षा का प्रसार और विदेशीशासको के विरुद्ध जिहाद की भावना को बनाये रखना। उलूम ने मोहम्मद कासिम ननोतवी एवं रशीद अहमद गंगोही के नेतृत्व में वेदबन्द ( उत्तर प्रदेश ) के सहारनपुर जिले में एक विद्यालय  30 मई 1866 को खोल गया। इस विद्यालय में अंग्रेजी शिक्षा और पाश्चातय संस्कृति पूरी तरहा वर्जित थी। इसके साथ ही साथ ये विद्यालय अलीगढ आंदोलन के एकदम विपरीत था। देवबन्द आन्दोलन 1885 में स्थापित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का स्वागत किया सन 1888 में उलूम ने सैयद अहमद खा द्वारा स्थापित संयुक्त भारतीय राजभक्त सभा एवं मुस्लिम एंग्लो ओरियंटल सभा के विरुद्ध फतवा जारी किया इस शाखा के एक अन्य नेता महमूद उल हसन थे। इन्होंने देवबन्द शाखा के धार्मिक विचारो को राजनीतिक और बौद्धिक बनाने के काम किया। आज देवबंद का उलूम विश्विद्यालय पुरे विश्व में इस्लामी शिक्षा के प्रसार के लिए प्रसिद्ध है।

गोलरोटेड वायरस से कम्प्यूटर को क्या खतरा है - Golroted Virus

भारत में कम्प्यूटर वैज्ञानिको कम्प्यूटर यूज़र्स को सूचित किया है कि यदि आप कंप्यूटर का प्रयोग करते है तो आपको सतर्क हो जाना चाहिए क्योकि दावा किया जा रहा है कि ट्रोजन केटेगरी में एक नया वायरस गोलरोटेड नाम से आया है। ये कंप्यूटर वायरस कंप्यूटर में बहुत ही आसानी से एन्टर कर जाता है। और ये आपके कम्प्यूटर की पर्सनल इनफार्मेशन को चोरी कर लेता है। गोलरोटेड वायरस आपके कंप्यूटर में ईमेल के अटेचमेंट जैसे ZIPPED और ARCHIVED या MICROSOFT OFFICE DOCUMENTS के जरिये एंटर कर जाता है। एक वायरस के द्वारा आने वाला ईमेल बहुत ही ORIGINAL और GENUINE लगता है। गोलरोटेड वायरस एक बार कंप्यूटर में प्रवेश करने के बाद यूजर की विभिन्न जानकारी जैसे COMPUTER NAME, LOCAL DATE, TIME , इन्टरनेट प्रॉटोकॉल एड्रेस और अन्य सेंसेटिव सिस्टम डिटेल्स आदि शामिल है। 
यफ कंप्यूटर वायरस एक बार सिस्टम में घुसने के बाद KEY STORKES LOG, SCREEN SHOT CAPTURE कर सकता है। 
यह SAVED PASSWORD के लिए वेब ब्राउज़र स्क्रैप कर सकता है। और ब्राउज़िंग हिस्ट्री आदि की जानकारी ले सकता है। इसके तहत वह बैंक डिटेल्स, ईमेल जैसी कई जानकारिया  होती है। जिन्हें ये वायरस चुरा लेता है। इस वायरस से बचने के लिए आपको आपने कंप्यूटर में एंटी मालवेयर इंजन इंसटाल करना चाहिए और उसे हमेसा अपडेट करते रहना चाहिए। और समय समय पर अपने कम्प्यूटर एंटी वायरस से स्कैन करते रहना चाहिए।

कम्प्यूटर के लिए खास ऑपरेटिंग सिस्टम (Importent Operating system)

operating system, type of operating system
 हाइकू प्रोजेक्ट :-
 सोर्स ने बहुत लम्बा सफर तय  किया है। हाइकू कम्युनिटी ने लम्बी रिसर्च के बाद इसे रेडेवेलप  करके मार्किट में लांच किया है। यह अब मुलती कोर प्रोसेसर के साथ अधिक तेजी से काम करता है। इसका साइज केवल 250 MB है। और इस का यूजर इंटरफ़ेस बहुत ही आसान है। यूजर चाहे तो इसकी वर्चुअल मशीन इमेज भी इंसटाल कर सकते है। अधिक जानकारी के लिए haiku-OS.org से संपर्क कर सकते है।

गूगल क्रोम ओएस:-
 गूगल का ये वेब बेस ऑपरेटिंग सिस्टम एक एडवांस OS है। और ये OS फ्री भी उपलब्ध है लेकिन इस ऑपरेटिंग सिस्टम को गूगल ने खुद नहीं बनाया है। इस OS को फ्रीलान्स प्रोग्रामर्स ने बनाया है। इस  ऑपरेटिंग सिस्टम को खास रूप से नोटबुक के लिए डिसीजन किया गया है। यह क्रोम ब्राउज़र के कस्टमाइज Version पर रन करता है। ये विण्डोज़ की अनुपस्थिति में यूजर्स के लिए एक उपयोगी ऑपरेटिंग सिस्टम होगा। गूगल ने इस ऑपरेटिंग सिस्टम को सपोर्ट करने वाली क्रोम बुक भी लॉन्च की है। इस ऑपरेटिंग सिस्टम के वेनिला वर्जन को डाउनलोड करने की लिए http://chromeOS.nexxeh.net लिंक का प्रयोग कर सकते है। इसकी ऍप्लिकेशन्स को Google Suit से डाउनलोड कर सकते है। 

फ्री बी एस डी :-
आज विण्डोज़ की लोकप्रियता के बावजूद भी लिनेक्स को चाहने वाले यूजर कम नहीं है। लेकिन अब यूजर इसमें विण्डोज़ का विकल्प तलासने लगे है। ये  कुछ विंडोज की तरह ही है। लेकिन इसका सेक्युरिटी सिस्टम हैकिंग प्रूफ और वायरस प्रोफ होता है। इसमें यूजर इंटरफ़ेस विंडोज के XP की तरह का है। लेकिन फिर भी पर विंडोज की ऍप्लिकेशन्स को सीधे सीधे रन नहीं करायी जा सकते है। अगर आपको विंडोज ऍप्लिकेशन्स को इसपर चलना है तो आपको आपने सिस्टम पर वाइन अप्स डाउनलोड कर इनस्टॉल करना होगा। अब आप लिनेक्स पर विंडोज अप्स चलायी  जा सकेगी। 
आप इस ऑपरेटिंग सिस्टम पर ओपन ऑफिस या लिब्री ऑफिस भी रन कर सकते है। इस OS को www.linuxmini.com के डाउनलोड कर सकते है। इस प्रकार आप माइक्रोसॉफ्ट के OS के लिए तकनिकी सहायता न मिल पाने की स्थिति  उपयुक्त बताये गए ऑपरेटिंग  सिस्टम को ट्राई कर सकते है। ये विकल्प सेफ भी है। और फ्री भी है।  इस ऑपरेटिंग सिस्टम में वायरस नहीं आता है और इसमें हैकिंग से बचने के भी अधिक फीचर्स अवेलेबल है।  जो इस आपने में खास बनाते है।

बिना चार्जर के लैपटॉप की बैटरी को कैसे चार्ज करे (How to Charge Laptop without Charger)


अगर आपके पास लैपटॉप है और आप उसे बिना और आप उसका चार्जर घर पर ही भूल आये है। तो आप अपने लैपटॉप को कैसे चार्ज कर सकते है। आजकल लैपटॉप कर प्रयोग अधिक होने लगा है। जिसका करना है उसका पोर्टेबल होना। लैपटॉप को आप कही भी आसानी से लेजा सकते है। लैपटॉप पर ज्यादा देर तक काम करने से उसकी बैटरी डाउन होने का खतरा बना रहता है। आप ऑफिस  काम से कही बहार गए हो, या यात्रा पर गये हो और आपके लैपटॉप का चार्जर ख़राब हो जाये या आप यात्रा पर गये हो और आपका चार्जर ख़राब हो जाये या आप अपने लैपटॉप का चार्जर घर पर भी भूल आये हो। तो ऐसे में आपको परेशान होने की कोई आवश्यकता नहीं है। इसके लिए हम आज आपको कुछ आसान ट्रिक बताते है जिनका प्रयोग करके आप अपने लैपटॉप को आसानी से चार्ज कर सकते है।  आप अपने लैपटॉप को चार्ज करने के लिए किसी यूनिवर्सल पावर एडाप्टर का प्रयोग कर सकते है। यह लैपटॉप को चार्ज करने का बहुत हे आसान तरीका है इस अडॉप्टर के साथ विभिन्न प्रकार की चार्जर पिन आती है जो किसी भी लैपटॉप में सेट हो जाती है। इसके साथ साथ आप अपने लैपटॉप को ऑटो और एयर एडॉप्टर की सहायता से भी चार्ज कर सकते है। ये अडॉप्टर एक नार्मल अडॉप्टर की तरह ही होता है। जिसे आप कार की सिगरेट लाइटर से कनेक्ट किया जा सकता है। सिगरेट लाइट से कनेक्ट होते ही आपका लैपटॉप चार्ज होने लगता है। इसके साथ साथ आप कोई एक्सटर्नल लैपटॉप बैटरी चार्जर भी ले सकते है। इसे आपको अपने लैपटॉप से कनेक्ट नहीं करना होगा बल्कि लैपटॉप की बैटरी को लैपटॉप से निकालकर इस चार्जर से अटेच करना होता है। एक बार लैपटॉप की बैटरी फुल चार्ज होने पर आप बैटरी को दोबारा लैपटॉप में लगा सकते है। इसका फायदा ये है की आप लैपटॉप की बैटरी को चार्ज करके भी रख सकते है। इस प्रकार इन आसान ट्रिक के द्वारा आप अपने लैपटॉप को बहिन चार्जर के भी आसानी से चार्ज कर सकते है।