पुराने मोबाइल फोन खरीदने वाले लोग उनका क्या करते हैं? Old Mobile Phone Buyers in Streets – Where Do These Phones Really Go?
आजकल आपने भी देखा होगा कि गली, मोहल्ले, कस्बे, यहाँ तक कि बड़े शहरों की कॉलोनियों में कुछ लोग आवाज़ लगाते घूमते हैं: “पुराना मोबाइल बेचो… टूटा-फूटा भी चलेगा!”
हममें से अधिकतर लोग सोचते हैं कि जो फोन अब चालू भी नहीं होता, उसकी क्या कीमत? लेकिन सच यह है कि आपके उस “बेकार” फोन के पीछे एक बहुत बड़ा Recycle, Refurbish, Spare Parts और E-waste Economy काम कर रही होती है। यह एक अनौपचारिक (informal) से लेकर संगठित (organized) तक फैला हुआ पूरा उद्योग है।
यह लेख इसी रहस्य को विस्तार से समझाता है—पुराने मोबाइल आखिर जाते कहाँ हैं, उनसे क्या निकाला जाता है, कौन खरीदता है, कैसे दोबारा बेचे जाते हैं, और आपको बेचते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
मोबाइल फोन के अंदर छिपा खजाना — Urban Mining & Precious Metals Recovery

एक स्मार्टफोन सिर्फ प्लास्टिक, ग्लास और सिलिकॉन नहीं है। उसके Printed Circuit Board (PCB) में कई कीमती धातुएँ होती हैं:
- Gold (सोना): कनेक्टर, माइक्रो-कॉन्टैक्ट्स में
- Silver (चाँदी): स्विच और माइक्रो-कंपोनेंट्स में
- Copper (ताँबा): PCB ट्रैक्स और वायरिंग में
- Palladium, Cobalt, Lithium: बैटरी और चिप्स में
इसी प्रक्रिया को Urban Mining कहा जाता है—यानी शहरों के कचरे से खनिज निकालना। बड़ी मात्रा में इकट्ठे किए गए फोनों को रासायनिक/यांत्रिक प्रक्रियाओं से प्रोसेस कर इन धातुओं को निकाला जाता है। यही वजह है कि टूटा फोन भी खरीदा जाता है।
स्पेयर पार्ट्स का सोना (Spare Parts Harvesting for Repair Markets)

कई बार फोन पुराना है, पर उसके पार्ट्स बिल्कुल ठीक होते है जैसे :
- स्क्रीन (Display)
- कैमरा मॉड्यूल
- स्पीकर, माइक्रोफोन
- वाइब्रेशन मोटर
- मदरबोर्ड के सेक्शन
ये पार्ट्स स्थानीय रिपेयर मार्केट में बहुत काम आते हैं, जहाँ “ओरिजिनल” पार्ट्स महंगे या दुर्लभ होते हैं।
दिल्ली के प्रसिद्ध बाज़ार जैसे गफ्फार मार्केट और करोल बाग ऐसे पार्ट्स की बड़ी खपत रखते हैं। यहाँ पुराने फोनों से निकले पार्ट्स से सैकड़ों फोन रोज़ ठीक किए जाते हैं।
रिफर्बिशिंग का खेल — Refurbishing & Second-Hand Resale Economy
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अगर फोन आंशिक रूप से ठीक है तो उसकी बॉडी (Housing) बदली जाती है, बैटरी बदली जाती है, स्क्रीन पॉलिश/रिप्लेस, सॉफ्टवेयर री-इंस्टॉल, फिर वही फोन “Like New” बनकर सेकंड-हैंड मार्केट में बिकता है—अक्सर गाँवों/कस्बों में जहाँ सस्ते स्मार्टफोन की मांग बहुत अधिक है।
ई-वेस्ट प्रबंधन — E-Waste Management & Environmental Safety
जो फोन बिल्कुल बेकार हैं, वे ई-वेस्ट चैन में जाते हैं। यहाँ बैटरी का लिथियम, विषैले तत्व सुरक्षित तरीके से निकाले जाते हैं ताकि पर्यावरण को नुकसान न हो। भारत में इस दिशा में दिशा-निर्देश Central Pollution Control Board (CPCB) द्वारा तय किए जाते हैं।
डेटा का खतरा — Data Security Risk Before Selling Old Phone
पुराना फोन बेचते समय सबसे बड़ा जोखिम: आपका निजी डेटा। फोटो, वीडियो, बैंकिंग ऐप्स, आधार/पैन की कॉपियाँ, पासवर्ड, ईमेल आदि का है
क्या करें?
- Factory Reset ज़रूर करें
- Reset से पहले फोन Encrypt करें
- SIM/SD कार्ड निकालें
- Google/Apple ID Logout
Android और iPhone में यह प्रक्रिया अलग होती है:
- Android डिवाइस: Settings → System → Reset
- Apple iPhone: Settings → General → Transfer or Reset iPhone
यह पूरा चक्र कैसे चलता है? — Old Phone Supply Chain
- गली-मोहल्ले से खरीद
- थोक में जमा
- पार्ट्स/रिफर्बिश/स्क्रैप में वर्गीकरण
- रिपेयर मार्केट / रिफर्बिश मार्केट / ई-वेस्ट प्लांट
यह एक अनौपचारिक लेकिन बेहद सक्रिय सप्लाई चेन है।
आपके लिए फायदे — Why You Should Not Throw Old Phones
- घर का कबाड़ कम
- पर्यावरण की रक्षा
- कुछ पैसे वापस
- दूसरे के लिए सस्ता फोन उपलब्ध
सावधानियाँ — Precautions While Selling Old Mobile
- बिना रसीद/पहचान के न बेचें
- IMEI नोट कर लें
- डेटा पूरी तरह मिटाएँ
- विश्वसनीय खरीदार चुनें
FAQ : अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. क्या टूटा फोन भी बिक सकता है?
हाँ, धातुओं और पार्ट्स के कारण।
Q2. क्या मेरा डेटा रिकवर हो सकता है?
अगर सही तरीके से Reset नहीं किया तो हाँ।
Q3. पुराने फीचर फोन का क्या उपयोग?
उनमें भी कॉपर, गोल्ड और पार्ट्स होते हैं।
Q4. क्या यह कानूनी है?
हाँ, लेकिन ई-वेस्ट नियमों का पालन जरूरी है।
Important Resources:
- Central Pollution Control Board — E-waste guidelines
- Apple — iPhone data erase guide
- Android — Android reset & encryption
आपका पुराना मोबाइल “कबाड़” नहीं, बल्कि संसाधनों का खजाना है। गली में घूमने वाले खरीदार एक बड़े इकोसिस्टम का हिस्सा हैं—जहाँ से धातुएँ निकलती हैं, पार्ट्स दोबारा काम आते हैं, फोन रिफर्बिश होकर फिर किसी के हाथ में पहुँचता है, और अंत में ई-वेस्ट सुरक्षित तरीके से प्रोसेस होता है।
अगली बार जब कोई आवाज़ लगाए—“पुराना मोबाइल बेचो”—तो समझिए, वह एक पूरी अर्थव्यवस्था का दरवाज़ा खटखटा रहा है।

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