UDID क्या है? (What is UDID – Unique Disability ID)
UDID (Unique Disability ID) यानी विशिष्ट दिव्यांग पहचान पत्र, भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य देश के सभी दिव्यांगजनों (Persons with Disabilities – PwDs) को एक यूनिक और डिजिटल पहचान प्रदान करना है। इस कार्ड के माध्यम से दिव्यांग व्यक्ति सरकारी योजनाओं, सुविधाओं और प्रमाण-पत्रों का लाभ आसानी, पारदर्शिता और एकरूपता के साथ प्राप्त कर सकते हैं।
यह योजना के अंतर्गत संचालित की जाती है।
UDID कार्ड का उद्देश्य (Objective of UDID Card)
UDID योजना को शुरू करने के पीछे सरकार के कुछ मुख्य उद्देश्य हैं:
- दिव्यांग व्यक्तियों के लिए एकल पहचान (Single Identity) बनाना
- अलग-अलग राज्यों में बने डुप्लीकेट डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट को रोकना
- दिव्यांगों का राष्ट्रीय स्तर पर डेटाबेस तैयार करना
- सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे और सरल तरीके से दिलाना
- कागजी प्रक्रिया को कम कर डिजिटल सिस्टम को बढ़ावा देना
UDID कार्ड क्या होता है?
UDID कार्ड एक स्मार्ट कार्ड / डिजिटल कार्ड होता है, जिसमें दिव्यांग व्यक्ति से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियाँ होती हैं, जैसे:
- यूनिक UDID नंबर
- दिव्यांगता का प्रकार (Type of Disability)
- दिव्यांगता का प्रतिशत
- नाम, जन्म तिथि, पता
- फोटो और QR कोड
यह कार्ड पूरे भारत में मान्य होता है।
UDID के लिए कौन आवेदन कर सकता है? (Eligibility for UDID)
UDID कार्ड के लिए वही व्यक्ति आवेदन कर सकता है:
- जो भारत का नागरिक हो
- जिसे सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त कम से कम 40% दिव्यांगता हो
- जिसके पास वैध डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट हो या वह बनवाना चाहता हो
UDID कार्ड के प्रकार (Types of Disabilities Covered under UDID)
UDID योजना के अंतर्गत 21 प्रकार की दिव्यांगताएँ शामिल हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
- दृष्टिबाधित (Blindness / Low Vision)
- श्रवण बाधित (Hearing Impairment)
- शारीरिक विकलांगता (Locomotor Disability)
- बौद्धिक दिव्यांगता (Intellectual Disability)
- मानसिक बीमारी (Mental Illness)
- ऑटिज़्म (Autism Spectrum Disorder)
- सेरेब्रल पाल्सी (Cerebral Palsy)
- मल्टीपल डिसेबिलिटी
UDID कार्ड के फायदे (Benefits of UDID Card)
UDID कार्ड दिव्यांगजनों के लिए कई तरह से लाभकारी है:
1. सरकारी योजनाओं में आसानी
- पेंशन योजनाएँ
- छात्रवृत्ति (Scholarship)
- फ्री/रियायती यात्रा सुविधा
- स्वास्थ्य और पुनर्वास सेवाएँ
2. एक ही कार्ड – हर जगह मान्य
- बार-बार डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट दिखाने की जरूरत नहीं
3. डिजिटल रिकॉर्ड
- ऑनलाइन वेरिफिकेशन
- कार्ड खोने का डर नहीं
4. पारदर्शिता और सम्मान
- दिव्यांगों को पहचान और अधिकार
UDID कार्ड के लिए आवश्यक दस्तावेज (Required Documents)
UDID आवेदन के समय निम्न दस्तावेज लगते हैं:
- आधार कार्ड
- पहचान प्रमाण (Voter ID / PAN आदि)
- निवास प्रमाण
- पासपोर्ट साइज फोटो
- पुराना डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट (यदि हो)
- मोबाइल नंबर
UDID कार्ड के लिए आवेदन कैसे करें? (How to Apply for UDID Card)
Step-by-Step प्रक्रिया:
- UDID की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ
- Register / Login करें
- व्यक्तिगत विवरण भरें
- दिव्यांगता से संबंधित जानकारी दर्ज करें
- दस्तावेज अपलोड करें
- आवेदन सबमिट करें
- मेडिकल बोर्ड द्वारा सत्यापन
- स्वीकृति के बाद UDID नंबर और कार्ड जारी
⏳ कार्ड जारी होने में आमतौर पर 2–4 सप्ताह लग सकते हैं।
UDID कार्ड का उपयोग कहाँ होता है? (Uses of UDID Card)
- सरकारी कार्यालयों में
- स्कूल/कॉलेज में एडमिशन
- रेलवे/बस यात्रा में रियायत
- बैंक और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में
- रोजगार एवं स्किल डेवलपमेंट योजनाओं में
UDID और Disability Certificate में अंतर
| बिंदु | Disability Certificate | UDID Card |
|---|---|---|
| मान्यता | राज्य स्तर | राष्ट्रीय स्तर |
| फॉर्म | कागजी | डिजिटल + कार्ड |
| डुप्लीकेसी | संभव | नहीं |
| डेटा | सीमित | केंद्रीकृत |
UDID से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
- UDID अनिवार्य नहीं, लेकिन अत्यंत उपयोगी है
- एक व्यक्ति को केवल एक UDID नंबर मिलेगा
- विवरण अपडेट कराना संभव है (Address, Mobile आदि)
Frequently Asked Questions (FAQ)
Q1. क्या UDID कार्ड बनवाना जरूरी है?
नहीं, लेकिन सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए यह बहुत फायदेमंद है।
Q2. UDID कार्ड कितने समय के लिए वैध होता है?
यह दिव्यांगता के प्रकार पर निर्भर करता है – स्थायी या अस्थायी।
Q3. UDID कार्ड खो जाए तो क्या करें?
आप ऑनलाइन लॉगिन करके डुप्लीकेट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं।
Q4. क्या बच्चे भी UDID के लिए आवेदन कर सकते हैं?
हाँ, नाबालिग दिव्यांग बच्चों के लिए भी UDID बनता है।
UDID (Unique Disability ID) दिव्यांगजनों के लिए केवल एक पहचान पत्र नहीं, बल्कि सम्मान, सुविधा और सशक्तिकरण का माध्यम है। यह योजना सरकार और दिव्यांग नागरिकों के बीच की दूरी को कम करती है और एक डिजिटल, पारदर्शी और समावेशी भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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