How to Create a Password Protected file in Microsoft Word ( माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस में पासवर्ड प्रोटेक्टेड फाइल कैसे बनाये)

जब हम माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस में अपनी कोई इम्पोर्टेन्ट फाइल क्रिएट करते है तो सबसे पहले ये ही सवाल उठता है की इस इम्पोर्टेन्ट फाइल को कैसे प्रोटेक्ट करे ताकि हमारी फाइल को कोई अन्य एक्सेस न कर पाए। कई बार होता ये है कि आपके कोई इम्पोर्टेन्ट फाइल है जिसे आप किसी और के साथ शेयर नहीं करना चाहते है और ये भी नहीं चाहते की कोई अन्य व्यक्ति आपके इम्पोर्टेन्ट पर्सनल डाटा को एक्सेस करे। इसके लिए माइक्रोसॉफ्ट वर्ड ने (Microsoft Word 2007 और Microsoft Word 2010 ) में एक सिक्युरिटी फीचर इंटीग्रेटिड किया है। आप आपने माइक्रोसॉफ्ट वर्ड के फाइल को सुरक्षित रखने के लिए निम्न स्टेप्स को फॉलो कर सकते है। 
Microsoft 2007:
सबसे पहले माइक्रोसॉफ्ट विण्डो के ऊपर बाये (Left) तरफ मौजूद माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस बटन पर क्लिक कीजिये। 
इसके बाद Save As ऑप्शन पर क्लिक कीजिये। 
अब एक नयी विण्डो ओपन होती जहा आपको विण्डो के बॉटम पर मौजूद टूल्स (Tools) ऑप्शन पर क्लिक करना है। 
अब आपको दो ऑप्शन मिलेंगे आप इनमे से एक या फिर दोनों ऑप्शन को सेलेक्ट कर सकते है। 
पहला ऑप्शन Password to Open है। ये डॉक्यूमेंट को खोलने पर हर बार पासवर्ड के लिए पूछेगा इसलिए डॉक्यूमेंट को जब भी आप व्यू करने के लिए ओपन करेगे आपको पहले पासवर्ड इनपुट करना पड़ेगा। 
दूसरा ऑप्शन है Password to Modify ये ऑप्शन आपके डॉक्यूमेंट को modify करने की कोशिश करने पर हर बार पासवर्ड के लिए पूछेगा। 


Microsoft 2010:
सबसे पहले माइक्रोसॉफ्ट विण्डो के ऊपर बाये (Left) तरफ मौजूद माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस बटन पर क्लिक कीजिये। 
इसके बाद Save As ऑप्शन पर क्लिक कीजिये। 
अब एक नयी विण्डो ओपन होती जहा आपको विण्डो के बॉटम पर मौजूद टूल्स (Tools) ऑप्शन पर क्लिक करना है। और tools में General Option पर Click करना है।
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अब आपको एक नयी विण्डो मिलेगी जिसमे दो ऑप्शन मिलेंगे आप इनमे से एक या फिर दोनों ऑप्शन को सेलेक्ट कर सकते है। 
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पहला ऑप्शन Password to Open है। ये डॉक्यूमेंट को खोलने पर हर बार पासवर्ड के लिए पूछेगा इसलिए डॉक्यूमेंट को जब भी आप व्यू करने के लिए ओपन करेगे आपको पहले पासवर्ड इनपुट करना पड़ेगा। 
दूसरा ऑप्शन है Password to Modify ये ऑप्शन आपके डॉक्यूमेंट को modify करने की कोशिश करने पर हर बार पासवर्ड के लिए पूछेगा।

नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize)

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विश्व का सबसे बड़ा पुरस्कार नोबेल पुरस्कार के बारे में तो आपने बहुत सुना होगा।ये विश्व का सबसे बड़ा पुरस्कार है। इस पुरस्कार के जन्मदाता महान वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल है। अल्फ्रेड नोबेल का जीवन बड़ी ही कठनाईयो में बिता लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनकी कठिन परिश्रम का ही परिणाम है की आज पूरा विश्व इनके इस योगदान को भूल ही नहीं पता है, ये एक ऐसे वैज्ञानिक थे जिनके जीवन में अनेक उत्तर चढाव आये पर इन्होंने कभी हार नहीं मानी और एक ऐसी खॊज की जिसने इंसान के जीवन को ही बदल डाला। महान वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल का जन्म 21 अक्टूबर 1833 में स्वीडन देश की राजधानी स्कॉट होम में हुआ था जो की बाल्टिक सागर की किनारे स्थित है। इनका पूरा नाम अल्फ्रेड बेर्नहार्ड नोबेल (Alfred Bernhard Nobel) है।
अल्फ्रेड नोबल बचपन से ही दुबले पतले और शरीर से बीमार रहते थे। अल्फ्रेड नोबल हमेशा नए नए प्रयोग करते रहते थे। स्वास्थ्य ठीक न होने के बावजूद उन्हें विस्फोटक बनाने में बाद रूचि थी। आपने कड़े परिश्रम और सच्ची मेहनत के करना की इन्होंने कई बड़े अविष्कार किये जिनमे सबसे मुख्य था "डायनामाइट" (Dynamit) जिसके बाद से ये पुरे देश में विख्यात हो गए। १८ वी सताब्दी तक पत्थरो की खुदाई करना बहुत ही परिश्रम का काम था। इस काम को करने की लिए हजारो की संख्या में मजदूरो की आवश्यकता होती थी। जिसमे बहुत अधिक समय और टाइम लगता था। इन पत्थरो की खुदाई के लिए अल्फ्रेड नोबेल का डायनामाइट वरदान सिद्ध हुआ। डायनामाइट की लोकप्रियता पुरे विश्व में बढ़ती गयी। अल्फ्रेड नोबल डायनामाइट का निर्माण बड़े पैमाने पर करना आरंभ किया। अब अल्फ्रेड नोबल की गिनती संसार के सबसे धनी व्यक्तियो में होने लगी थी। इन्होंने आजीवन विवाह नहीं किया और एकांत जीवन बिताया। १० दिसम्बर १८९६ को इनकी मृत्य हो गयी अल्फ्रेड नोबल की मृत्यु के बाद 1897 में उनकी वसीयत को खोलकर पढ़ा गया तो अभी दांग रह गए। उनकी वसीयत में लिखा था की उनकी सारी जायदात को बेच किया जाये। तथा उससे जो भी धन प्राप्त हो उसे बैंक में जमा कर किया जाये। तथा उस धन से जो ब्याज की रकम प्राप्त हो उससे हर साल उन 5 पुरस्कार उन लोगो को दिए जाये जिन्होंने भौतिक विज्ञानं , रसायन विज्ञानं , चिकित्सा विज्ञानं, साहित्य और शांति के क्षेत्र उल्लेखनीय कार्य किया हो। अल्फ्रेड नोबल एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने अपनी सारी सम्पति को मानव सेवा के लिए दान कर किया। इसलिए अल्फ्रेड नोबल के इस पुरस्कार को नोबल (Nobel Prize)  के नाम से जानना जाता है। 10 दिसम्बर 1901 से नोबल पुरस्कार देना आरम्भ किया गया। आरंभ में इस पुरस्कार की कीमत 10 या 15 लाख होती थी। लेकिन अब  इस पुरस्कार की  लगभग 36 से 37 लाख होती है। भारत में सबसे पहला नोबल पुरस्कार 1913 में  महान कवि "रविन्द्र नाथ टैगोर" को दिया गया था। इसके आलावा भी ये पुरस्कार डॉ० सी० वी० रमन और डॉ. हरगोविंद खुराना को विज्ञानं के क्षेत्र में, मदर टेरेसा को शांति के क्षेत्र में और अमर्त्के सेन को अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ। 

सामान्य ज्ञान भाग -1 (General Knowledge Part-1)

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  1. फ़्रांस एक इस देश है जहा मच्छर नहीं पाए जाते है। 
  2. नेपाल विश्व का एक ऐसा देश है जो कभी किसी का गुलाम नहीं हुआ है।  
  3. दुनिया का सबसे बड़ा महल इटली देश में स्थित है। 
  4. विश्व का सबसे गरीब देश भूटान है। 
  5. अकबर बीरबल की कहानी के पात्र बीरबल का असली नाम महेश दास था। 
  6. क्या आपको पता है की चीन के लोग साँप को खा लेते है। 
  7. विश्व की सबसे खूबसूरत ईमारत ताजमहल का निर्माण २२ वर्ष में पूरा हुआ था और इसे पूरा करने में लगभग ३ करोड़ का खर्च आया था।  
  8. अजगर साँप का वजन १०० किलो ग्राम से अधिक होता है। 
  9. क्या आपको पता है की चाँद पर एक दिन पृथ्वी के २२ दिन के बराबर होता है। 
  10. क्या आपको पता है की एक मच्छर के मुँह में २२ दांत होते है। 
  11. कुतुबमीनार में ३६९ सीढिया है। 
  12. क्या आपको पता है की भालू एक इस जानवर है जो दुखी होने पर मनुष्य की तरह रोता है। 
  13. विश्व में केवल तोता ही एकमात्र पक्षी है  जो मनुष्य की तरह जम्हाई लेता है। 
  14. दुनिया का सबसे बड़ा चिड़ियाघर लन्दन में स्थित है। 
  15. क्या आपको पता है की एशिया की सबसे बड़ी गुड़ मंडी भारत के मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश ) शहर में स्थित है। एक ;सामान्य मनुष्य के दिल का वजन लगभग १२ औंस के बराबर होता है। 
  16. दुनिया की सबसे बड़ी फ़ौज (सेना)  चीन की है।
  17. नाइट्रस ऑक्सइड को सूंघने से मानुष हस्ता  रहता है। 
  18. मनुष्य की त्वचा में लगभग ७२ किलोमीटर नर्वस होती है। 
  19. मनुष्य की आँख में लगभग 1200000 फाईबर होते है। 
  20. मनुष्य की आँख ही एकमात्र इस Multi Focuse Lens है जो मात्र २ मिली सेकंड में एडजेस्ट हो जाता है।
  21. सामान्य मनुष्य के कान ५०००० हर्ट्ज तक की ध्वनि को सुन सकते है। 
  22. एक नवजात शिशु एक मिनुत में ६० बार सास लेता है , एक किशोर एक मिनुत में २० बार सास लेता है और एक युवा एक मिनट में १६ बार सास लेता है
  23. एक सामान्य मनुष्य के शरीर में इतना आयरन होता है कि उससे एक इंच की लोहे की कील तैयार की जा सकती है। 
  24. क्या आपको पता है की मनुष्य की मौत हो जाने के बाद भी उसके नाख़ून और बाल बढ़ते रहते है।

सेन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (Central Processing Unit) या C.P.U.

cpu, c.p.u., central processing unit, microprocessor, micro processer,सेन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (Central Processing Unit) या C.P.U. कंप्यूटर  का एक बहुत ही मुख्य भाग है जिसके आभाव में कंप्यूटर की कल्पना करना असंभव है। सी० पी० यू० का मुख्य कार्य कंप्यूटर प्रोग्रामो को क्रियान्वित करना है। इसके साथ साथ C.P.U. कंप्यूटर के विभिन्न भागो जैसे - मेमोरी , इनपुट , और आउटपुट , डिवाइस के कार्यो को भी नियंत्रित करना है। प्रोग्राम और डाटा कंप्यूटर में C.P.U. के नियंत्रण में मेमोरी में संग्रहित होता है। इसे की नियंत्रण के द्वारा डाटा कंप्यूटर स्क्रीन पर दिखाई देता है और प्रिंटर पर प्रिंट भी होता है। माइक्रो कंप्यूटर में C.P.U. एक छोटा सा माइक्रोप्रोसेसर होता है। C.P.U. के माइक्रोप्रोसेसर पर तीन भागो का परिपथ होता है। जिन्हें हम CU, ALU, और REGISTER कहते है। माइक्रो प्रोसेसर के अविष्कार से पहले कंप्यूटर का परिपथ ट्रंजिस्टरो को संयोजित करके तैयार किया जाता था। कंप्यूटर को अधिक कार्यकुशल बनाने के लिए इन परिपथों में ट्रन्जेस्ट्रो की संख्या को अत्यधिक बढ़ाया गया। जिसके कारण ट्रंजिस्टरो का परिपथ जटिल होता गया और परिपथ में अधिक ताप उत्पन होने से इनके ख़राब होने की सम्भावना होने लगी। अतः अब एक ऐसी चिप की आवश्यकत हुई। जिसमे अनेक ट्रांजिस्टरों के तुल्य परिपथ हो। 
सबसे पहला माइक्रोप्रोसेसर सन 1970 में इंटेल कारपोरेशन (INTEL CORPORATION) ने Intel 4004 के रूप में तैयार किया Intel 4004 चिप में लगभग २३०० ट्रांजिस्टरों के बराबर क्षमता थी माइक्रो प्रोसेसर  आधे इंच का वर्गाकार सिलिकॉन पदार्थ का टुकड़ा होता है। जो एक छोटे खोल में छोटे छोटे कनेक्टर्स के साथ व्यवस्थित रहता है। इंटेल ४००४ चिप के बाद माइक्रोप्रोसेसर की तकनीक विकसित होती गयी। 
Intel 80286 में १३०००० ट्रांजिस्टर तथा Intel 80486 में १२०००० ट्रांजिस्टरों के बराबर परिपथ होते है। अब तो पेन्टियम 1, पेन्टियम 2, पेन्टियम 3, पेन्टियम 4, Dual Core, Core २ Due,Cuard Core, i3, i5 और i7 आदि उच्च क्षमता वाले माइक्रोप्रोसेसर विकसित हो चुके है।  

विचित्र पहेलियाँ भाग -3

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पहेली 1 : भिखारी नहीं पर भीख मांगता है, लड़की नहीं पर पर्स रखता है, पुजारी नहीं पर घंटी बजट है बताओ कौन है वो?
Bikhari nahi par bikh mangata hai, ladaki nahi par pars rakhta hai, pujari nahi hai par ghanti bajata hai.
batao kon hai wo?
उत्तर :- बस कंडक्टर (Bus Conductor)

पहेली 2 : दो सुन्दर लड़के दोनों एक रंग के, एक बिछड़ जाये तो दूसरा काम ना आये बताओ कौन है ये।
Do Sunder Ladke Dono ek hi Rang Ke, Agar Ek Bichad Jaye To Dusra Kaam Na Aaye
उत्तर : जूता (Shoes)

पहेली 3 : ऐसी कौन सी चीज है जिसे आगे से तो भगवन ने बनाया है और पीछे से इंसान ने ?
Aisi kon se chiz hai jise Aage se to bnaya hai bhagwan ne Or piche se insaan ne?
उत्तर : बैल गड्डी (Ball Gaddi)

पहेली 4 : एक गुफा के दो रखवाले दोनों लंबे दोनों काले बताओ कौन है ये ?
Ek Gufa ke Do Rakhwale. Dono Lambe Dono Kale kon hai ye? 
उत्तर : मूछ (Muche)

पहेली 5 : ऐसी कौन सी चीज है जो अधिक ठण्ड में भी पिंघलती है
Aisi kon si cheej hai Jo adhik thand Sardi me bhi pigalti hai?
उत्तर : मोमबत्ती (Candle)

पहेली 6 : पढ़ने में लिखने में दोनों में ही मैं आता काम पेन नही कागज नहीं बताओ क्या है मेरा नाम ?
Padhne me Likhne me Dono Me hi Main Aata Kaam. Pen Nhi Kagaj Nhi Btao jra kya hai Mera Naam?
उत्तर : चश्मा (Chasma)

कम्प्यूटर का वर्गीकरण (Classification of Computer in Hindi)

कंप्यूटर का प्रत्यक्ष रूप से सीधा वर्गीकरण (Direct Classification ) करना बहुत ही मुश्किल है। कम्प्यूटर का वर्गीकरण उनके काम काज, प्रयोग , और उद्देश्यों के आधार पर किया सकता है। इसलिए कंप्यूटर का वर्गीकरण हम तीन आधार पर करते है।
1. अनुप्रयोग के आधार पर (Application)
2. उद्देश्य के आधार पर (Purpose)
3. आकर के आधार पर (Size)

(1). अनुप्रयोग के आधार पर कम्प्यूटर का वर्गीकरण (Type of Computer Based on Application)
अनुप्रयोगों के आधार पर कंप्यूटर को तीन भागो में बाटा जा सकता है
(A) एनालॉग कंप्यूटर (Analog Computer )
(B) डिज़िटल कम्प्यूटर (Digital Computer)
(C) हाइब्रिड कम्प्यूटर (Hybrid Computer)

एनालॉग कंप्यूटर (Analog Computer)
इस श्रेणी में वे कंप्यूटर आते है जिनका प्रयोग भौतिक इकाइयों (दाब , तापमान , लंबाई ,आदि ) को मापकर उनको अंको में परिवर्तित करते है। ये कंप्यूटर किसी भी राशि का मापन तुलना के आधार पर करते है। जैसे की थर्मामीटर को गणना नहीं करता है। बल्कि पर के सम्बंधित प्रसार (Relative Expansion) की तुलना करके शरीर के तापमान को मापता है। एनालॉग कॉम्प्यूटर का प्रयोग मुख्य रूप से विज्ञानं और इंजीनरिंग के क्षेत्रो में किया जाता है। क्योकि इन क्षेत्रो में मात्राओ का अधिक प्रयोग किया जाता है। इस प्रकार के कंप्यूटर केवल अनुमानित अनुमान ही देते है।  जैसे - किसी पेट्रोल पंप पर लगा  एनालॉग कंप्यूटर पंप से निकलने वाले पेट्रोल की मात्रा को मापता है और लीटर में दिखता है। और उसके मूल्य की गणना करता है।
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 डिजिटल कॉम्प्यूटर (Digital Computer)
इस श्रेणी में वे कंप्यूटर आते है जो अंको की गणना करते है जब लोग कंप्यूटर के बारे में बाते करते है तो अधिकतर डिजिटल कंप्यूटर ही केंद्र बिंदु होता है। इस श्रेणी में वो कंप्यूटर आते है जो बाजार को चलते है , घरो का बजट तैयार करते है और अन्य सभी प्रकार के वे कार्य जो कंप्यूटर पर किये जा सकते है कर सकते है। इसलिए अधिकतर कंप्यूटर डिज़िटल कंप्यूटर के श्रेणी में ही आते है। डिजिटल कंप्यूटर डाटा और प्रोग्राम को 0 और 1 में परिवर्तित करके उसको इलेक्ट्रॉनिक रूप में ले जाते है।
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 हाइब्रिड कम्प्यूटर (Hybrid Computer)
ये कंप्यूटर अनेक गुणों से युक्त होते है इसलिए इन्हें हाइब्रिड कंप्यूटर कहा जाता है। इन कंप्यूटर्स में एनालॉग कंप्यूटर और डिजिटल कंप्यूटर दोनों के ही गुण विधमान होते है। ये कंप्यूटर अधिक विश्वशनीय होते है। उदहारण के लिए जब कंप्यूटर की एनालॉग डिवाइस किसी रोगी के लक्षणों जैसे तापमान या रक्तचाप आदि को मापती है तो ये माप बाद में डिजिटल भागो के द्वारा अंको में बदल दी जाती है। इस प्रकार से किसी रोगी के स्वास्थ्य में आये उत्तर चढ़ाव का तुरंत सही पता चल जाता है।
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(2) उद्देश्यों के आधार पर कंप्यूटर का वर्गीकरण (Type of Computers based on Purpose)
उद्देश्यों के आधार पर कंप्यूटर को हम दो भागो में बात सकते है।
(A) सामान्य उद्देश्य कंप्यूटर (General Purpose Computer)
(B) विशिष्ठ उद्देश्य कम्प्यूटर (Special Purpose Computer)

सामान्य उद्देश्य कंप्यूटर (General Purpose Computer)
इन कंप्यूटर्स में अनेक प्रकार के कार्य करने की क्षमता होती है लेकिन ये सभी कार्य सामान्य होते है किसी विशेष प्रकार के नहीं होते है। जैसे वर्ड प्रोसेसिंग से (Word Processing) लेटर लिखना। Document तैयार करना। दस्तावेजो को छापना , डाटाबेस बनाना। इन कंप्यूटर में लगे हुए C.P.U. की क्षमता भी काम होती है। इन कंप्यूटर में हम किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए कोई स्पेशल डिवाइस नहीं जोड़ सकते है। क्योकि इन की C.P.U. की कार्यक्षमता बहुत काम होती है।  इसलिए इन्हें केवल सामान्य उद्देश्य के लिए ही उपयोग किया जा सकता है।

विशिष्ठ उद्देश्य कम्प्यूटर (Special Purpose Computer) 
इन कम्प्यूटर को किसी विशेष कार्य के लिए बनाया जाता है इन कंप्यूटर के C.P.U. की क्षमता उस उस कार्य के अनुरूप होती है। जिस कार्य के लिए इस कंप्यूटर को बनाया जाता है। अगर इन कंप्यूटर एक से ज्यादा C.P.U. की आवश्यकता होती है तो इन कंप्यूटर की रचना अनेक C.P.U. वाली कर दी जाती है। जैसे - संगीत संपादन करने के लिए स्टूडियो में लगाया जाने वाला कंप्यूटर विशिष्ट प्रकार का कंप्यूटर होता है। इस कंप्यूटर में संगीत से सम्बंधित उपकरणों को जोड़ा जा सकता है।
इसके आलावा इन कंप्यूटर का प्रयोग आने क्षेत्रो में किया जाता है जैसे - अंतरिक्ष विज्ञानं ,मौसम विज्ञानं ,युद्ध के क्षेत्र , उपग्रह संचालन में ,चिकित्सा के क्षेत्र में, भौतिक रसायन में , यातायात नियंत्रण में ,समुन्दर विज्ञानं में , कृषि विज्ञानं में , इंजीनरिंग आदि क्षेत्रो में इन कंप्यूटर का प्रोयग किया जाता है।  

(3) आकार के आधार पर कंप्यूटर का वर्गीकरण (Types of Computers based on Size) 
 आकर के आधार पर कंप्यूटर को निम्नलिखित भागो में बाटा गया है।
(A) माइक्रो कंप्यूटर (Micro Computer)
(B) मिनी कम्प्यूटर (Mini Computer)
(C) मेनफ्रेम कम्प्यूटर (Mainframe Computer)
(D) सुपर कंप्यूटर (Super Computer)

माइक्रो कंप्यूटर (Micro Computer)
कंप्यूटर तकनीक के क्षेत्र में 1970 के दसक में एक बहुत बड़ा अविष्कार हुआ।  ये अविष्कार था माइक्रो प्रोसेसर का इस अविष्कार के साथ ही एक सस्ती और अच्छी कंप्यूटर प्रणाली बनना सम्भव हुआ। इस प्रकार निर्मित कंप्यूटर एक डेस्क पर या एक ब्रीफकेश में भी रखा जा सकता था। इन छोटे कंप्यूटर को ही माइक्रो कंप्यूटर कहते है। माइक्रो कंप्यूटर कीमत में काम और आकर में छोटे होते है। इन कंप्यूटर को व्यक्तिगत उपयोग के लिए घर या बाहर किसी भी कार्य क्षेत्र में लगाया जा सकता है। इन कंप्यूटर्स को पर्सनल कंप्यूटर (Personal Computer ) या P.C. भी कहते है। माइक्रो कंप्यूटर का व्यापर में बहुत महत्व है व्यापर बड़ा हो या छोटा ये हर प्रकार के व्यापर में प्रयोग किये जाते है। छोटे व्यापार में ये किये गए कार्य का ब्यौरा रखते है , पत्र व्यवहार के लिए पत्र तैयार करता है। उपभोग्ताओ के लिए बिल बना सकते है , एकाउंटिंग में प्रयोग कर सकते है , बड़े व्यापार में Word Processing और फाइलिंग प्रणाली के संचालन में उपयोगी है। माइक्रो कंप्यूटर में एक ही C.P.U. लगा होता है। आज वर्तमान में माइक्रो कंप्यूटर का विकास बहुत तेजी से हो रहा है। जिसके परिणाम सवरूप आज माइक्रो कंप्यूटर एक पुस्कत के आकर , फोन के आकर , और यहाँ तक की एक घडी के आकर में भी आने लगे है। 

 मिनी कम्प्यूटर (Mini Computer)
सबसे पहला मिनी कंप्यूटर पीडीपी-८ (PDP-8) एक रेफ्रिजरेटर के आकर का था जिसकी कीमत 18000 डॉलर थी जिसे डी.ई.सी. (DEC - Digital Equipment Corporation) ने 1965 में तैयार किया था। ये कम्प्यूटर माध्यम आकर के कंप्यूटर होत्ते है। ये कंप्यूटर माइक्रो कंप्यूटर की तुलना में अधिक कार्यक्षमता वाले होते है। मिनी कंप्यूटर की कीमत माइक्रो कंप्यूटर से अधिक होती है। इन कंप्यूटर्स की व्यक्तिगत रूप से नहीं ख़रीदा जा सकता है। इन कंप्यूटर्स को छोटे और माध्यम आकर की कंपनिया प्रयोग में लेती है। इन कंप्यूटर पर एक साथ एक से अधिक व्यक्ति कार्य कर सकते है। मिनी कंप्यूटर्स में एक से अधिक C.P.U. होते है। इन कंप्यूटर्स के स्पीड माइक्रो कंप्यूटर से अधिक लेकिन मेनफ्रेम कंप्यूटर से कम होती है। माध्यम स्तर की कंपनियों में मिनी कंप्यूटर ही प्रयोग होते है। पार्टी व्यक्ति माइक्रो कंप्यूटर की अपेक्षा मिनी कंप्यूटर कंपनी में केंद्रीय कंप्यूटर के रूप में कार्य करता है। और इससे कंप्यूटर के संसाधनों का साझा हो जाता है। मिनी कंप्यूटर के उपयोग यातायात में यात्रियों के आरक्षण के लिए आरक्षण प्रणाली , बैंको में बैंकिंग के लिए , कर्मचारियों के वेतन के लिए पेरोल तैयार करना, वितीय खातों का रखरखाव रखना आदि। 

 मेनफ्रेम कम्प्यूटर (Mainframe Computer)
मेनफ्रेम कंप्यूटर आकर में बहुत छोटे होते है। तथा इनकी भण्डारण क्षमता भी अधिक होती है। इनमे अधिक मात्रा में बहुत ही तीव्र गति से डाटा को प्रेसेस करने की क्षमता होती है। इसलिए इनका प्रयोग बड़ी कंपनियों, बैंको , सरकरी विभागों में केंद्रीय कंप्यूटर के रूप में किया जाता है। ये कंप्यूटर 24 घंटे कार्य कर सकते है। इन कॉम्प्यूटेस पर सेकड़ो यूज़र्स एक साथ कार्य कर सकते है। मेनफ्रेम कंप्यूटर को एक नेटवर्क या माइक्रो कंप्यूटरो के साथ आपस में जोड़ा जा सकता है। इन कंप्यूटर्स का प्रयोग विभिन्न कार्यो की लिए किया जा सकता है। जैसे - उपभोग्ताओ द्वारा खरीद का ब्यौरा रखना, भुगतानों का ब्यौरा रखना , बिलो को भेजना ,नोटिस भेजना , कर्मचारियों का भुगतान करना , टेक्स का विस्तृत ब्यौरा रखना आदि। कुछ मेनफ्रेम कंप्यूटरो की नाम है - IBM 4381, ICL39 Series और  CDC Cyber Series.
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सुपर कंप्यूटर (Super Computer)
ये कंप्यूटर अन्य सभी श्रेणियों के कंप्यूटर की तुलना में सबसे बड़े , सबसे अधिक संग्रह क्षमता वाले , सबसे अधिक गति वाले होते है। इन कंप्यूटर्स में अनेक C.P.U. समान्तर क्रम में कार्य करते है। इस क्रिया को Parallel Processing कहते है। सुपर कम्प्यूटर नॉन-वॉन न्यूमेन सिद्धान्त (Non-Von Neumann Concept) के आधार पर तैयार किये जाते है सुपर कंप्यूटर में अनेक ए०एल०यू० (A.L.U.), सी० पी० यू० (C.P.U.) का एक भाग होता है। इनमे प्रत्येक ALU एक निश्चित कार्य के लिए होता है। सभी ALU एक समान्तर क्रिया करते है। सुपर कंप्यूटर्स का प्रयोग बड़े वैज्ञानिक और शोध प्रयोगशालाओ में शोध कार्यो में होता है, अंतरिक्ष यात्रा के लिए अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजना, मौसम की भविष्यवाणी करना, उच्च गुणवत्ता की एनीमेशन वाले चित्रो का निर्माण करना। इन सभी कार्यो में की जाने वाली गणना व प्रक्रिया जटिल व उच्चकोटि की शुद्धता वाली होती है। जिन्हें केवल सुपर कंप्यूटर ही कर सकता है। भारत के पर PARAM नाम का सुपर कंप्यूटर है। जिसे भारत के वेज्ञानिको ने भारत में ही तैयार किया है। परम कंप्यूटर का विकसित रूप PARAM-10000 है।  इसके आलावा अन्य सुपर कंप्यूटर भी है जैसे - CRAY-2, CRAY XMP-24 और NEC-500.
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कंप्यूटर माउस की खोज (Invention of the First Computer Mouse)

 first invention of the computer mouse, computer mouse, history of computer mouse, world first computer mouse.कंप्यूटर माउस को कंप्यूटर के युग की एक अदभुत खोज मानी जाती है क्योकि कंप्यूटर माउस की खोज के साथ ही एक नये कंप्यूटर युग की शुरुआत हुई। आज मैं आपको कंप्यूटर माउस के बारे में बताऊंगा की उसकी खोज किसने और कैसे की।first invention of the computer mouse, computer mouse, history of computer mouse, world first computer mouse, computer mouse ki khoj kisne ki thi
 कंप्यूटर माउस की खोज डगलस एंजेलबर्ट ( Douglas Engelbart )  ने बिल इंग्लिश (Bill English) की सहायता से सन 1960 के दौरान की तथा १९७० को इसका पेटेंट कराया गया। जब Douglas Engelbart  ने माउस की खोज की थी उस समय डगलस स्टेनफोर्ड रिसर्च इंस्टिट्यूट (Stanford Research Institute) में कार्य कर रहे थे। सर्वप्रथम माउस को मूल रूप से "एक प्रदर्शन प्रणाली के लिए XY स्थिति संकेतक" (X-Y Position Indicator for a Display System") भेजा गया  था। तथा माउस का पहली पर प्रयोग १९७३ में जेरोक्स ऑल्टो कंप्यूटर सिस्टम के साथ में किया गया था। डगलस का ये माउस आल्टो कंप्यूटर (Alto computer) पर  कर्सर को हिलाने मे सक्षम था। पहले माउस का प्रयोग सबसे पहले एप्पल लिसा कंप्यूटर (Apple Lisa computer) पर किया गया था।इस प्रथम माउस की  जानकारी आज भी न्यू मैक्सिको के संग्रालय में सुरक्षित है।और  कंप्यूटर माउस का उदहारण है ये माउस लकड़ी का बनाया गया था जैसा की आप चित्र में देख सकते है। ये माउस आज के आधुनिक माउस से कई गुणा बड़ा था। और इस माउस के राईट साइड वाले कोने पर एक बटन था।

आपने करप्टीड पेन ड्राइव को कैसे रिपेयर करे (How to Repair Your Corrupted Pen Drive)

दोस्तों आज हम जानेगे की आप अपनी करप्टेड पेन ड्राइव को कैसे रिपेयर करे। होता क्या है कई बार आपका पेन ड्राइव कंप्यूटर में नहीं ओपन होता है और फॉर्मेट भी नही होता है ऐसे में आपके पेन ड्राइव गलत साइज भी दिखता है। अगर एक है तो डरने की जरुरत नहीं है। बस आपको कुछ इजी स्टेप्स को फॉलो करना है और आप अपने पेन ड्राइव को रिपेयर कर सकते है। 

१. सबसे पहले आपको आपने कंप्यूटर में Command Prompt को ओपन करना है इसके लिए आपको आपने कंप्यूटर में Accessories में जाकर "Command Prompt" पर Right Click करके Command Prompt को Run as Administrator पर रन करना है या 

२. Command Prompt को ओपन करके हमें डिस्क यूटिलिटी का प्रयोग करना है जिसका नाम है DISKPART 
C:\WINDOWS\SYSTEM32>DISKPART←
 DISKPART कमांड को टाइप करने के बाद आपके DISKPART यूटिलिटी के अंदर आ जायगे जो निम्न प्रकार दिखाई देगी। 
C:\DISKPART>

३. अब आपको यहाँ LIST DISK कमांड टाइप करनी होगी जो निम्न प्रकार है
C:\DISKPART>LIST DISK
 इस कमांड के प्रयोग से हम ये देखते है की हमारे कंप्यूटर पर इस टाइम कितने डिस्क आटचटेड है जिनमे एक डिस्क आपके पेन ड्राइव या मेमोरी कार्ड का भी होगा। 
आप आपको यहाँ पर आपने उस डिस्क का साइज मालूम होना चाहिए जिसे आपको फॉर्मेट करना है। 

४. अब आप SELECT DISK 1 (यहाँ आपको SELECT DISK के बाद आपने उस DISK का नंबर लिखना है जिसे आपको फॉर्मेट करना है। )
C:\DISKPART>SELECT DISK 1
अब आपको एक सन्देश प्राप्त होगा "Disk 1 is now the Selected disk" इसका मतलब है की जिस डिस्क को आपको फॉर्मेट करना है अब वो डिस्क सिलेक्टेड है।

इसके कमांड के प्रयोग से आप आपने उस डिस्क को सेलेक्ट करलेंगे जिसे आपको फॉर्मेट करना है।यहाँ पर मेरे पेन ड्राइव का डिस्क नंबर 1 है इसलिए मेने SELECT DISK 1 को सेलेक्ट किया है। 

५. आप आपके CLEAR कमांड को लगाएंगे हो सकता है की ये कमांड एक बार में काम न करे ऐसे में आप CLEAR कमांड को ३ या ४ बार प्रयोग कर सकते है। 
C:\DISKPART>CLEAR
 अब आपको एक सन्देश प्राप्त  होगा "Diskpart succeeded in cleaning the disk" इसका मतलब है की आपके डिस्क क्लीन हो चूका है। 

६. अब आपके पटीशन क्रिएट करेगे जिसके लिए आपको एक कमांड चलानी होगी जो निम्न प्रकार है। 
 C:\DISKPART>CREATE PARTITION PRIMARY

अब आपको एक  सन्देश प्राप्त होगा "Diskpartt succeeded in creating the specified patition."
इसका मतलब है कि आपका पार्टीशन बन चूका है। 

७. अब एक पार्टीशन को एक्टिव करना होगा जो निम्न कमांड के द्वारा कर सकते है। 
 C:\DISKPART>ACTIVE
अब आपको एक सन्देश प्राप्त होगा "Diskpart marked the current partition as active" इसका मतलब है की आपका पार्टीशन अब एक्टिव हो चूका है। 

८. अब आपको अपने पार्टीशन को फॉर्मेट करना है जिसके लिया आप अपने पार्टीशन को सेलेक्ट करेगे जो कि आप निम्न कमांड के द्वारा कर सकते है। 
C:\DISKPART>SELECT PARTITION 1
 अब आपको एक सन्देश प्राप्त होगा "Partition 1 is now the selected partition" इसका मतलब है के अब आपका पार्टीशन सिलेक्टेड पार्टीशन है। 

९. अब आप अपने पेन ड्राइव या SD Card को फॉर्मेट कर सकते है अधिकतर पेन ड्राइव या DS Card "Fat 32" पर ही फॉर्मेट होते है। इसके लिए आपको निम्न कमांड का प्रयोग करना होगा। 
C:\FORMAT  FS-FAT32
अब आपका पेन ड्राइव फॉर्मेट होना आरम्भ हो जायेगा। हो सकता है की इसमें थोड़ा सा टाइम लग जायगे पर आपको थोड़ा WAIT करना होगा जब त्तक की आपका पेन ड्राइव पूरी तरह से १००% फॉर्मेट न हो जाये। 
फॉर्मेट होने के बाद आपका पेन ड्राइव विंडो में Show होने लगेगा।
 

आपके द्वारा सेन्ड किये गए ईमेल को कैसे रोके (How To Stop Sent E-Mail)

दोस्तों आज  मैं आपको बताऊंगा की आप आपने द्वारा Sent किये गए E-Mail को कैसे रोक सकते है। ये सम्भव है। अगर आपसे जल्दबाजी में ईमेल टाइप करते टाइम कोई गलती हो जाती है और आपको उस गलती का पता ईमेल Send करने के बाद चलता है तो आप आपने द्वारा send किये गए ईमेल को कुछ सेकण्ड्स के अंदर रोक सकते है।  बस आपको कुछ इजी स्टेप्स को फॉलो करना होगा।

१. सबसे पहले आप आपना जीमेल अकाउंट ओपन करिये और आपने अकॉउंट की दायीं तरफ ऊपर बने गियर बटन पर क्लिक कीजिये, यह गियर बटन आपको अपनी गूगल प्लस प्रोफाइल के एकदम नीचे दिखाई देगा। इसके ड्रोपडऊन मेनू से सेटिंग को सेलेक्ट कीजिये।
२. इसके बाद आपके सामने कई सरे टेब्ड ऑप्शन होंगे। इनमे से आपको Labs को सेलेक्ट करना है और नीचे तक स्क्रॉल करना है।

 ३. अब आपको नीचे से तीसरे नम्बर पर Undo Send का Option मिलेगा इस option को Enable कर दे।
४. अब Right साइड की स्क्रीन को नीचे की और स्क्रॉल करे और Save Changes पर क्लिक कर दे।
५. Save Changes पर क्लिक करने के बाद आप फिर से Inbox पर पहुँच जायेगे। अब आप फिर से गियर बटन पर जाकर Setting ऑप्शन को सेलेक्ट करे।
६. अब अगले क्रम में आपके सामने एक डिफ़ॉल्ट General टैब ओपन होगा। टैब में नीचे स्क्रॉल करे अब आपको टिकमार्क लगा हुआ Undo Send का ऑप्शन मिलेगा। जिससे आपको पता चलेगा की आपका पहला ऑप्शन सेव हो गया है।

इन टिकमार्क से बिलकुल नीचे आप भेजे गये मेल को रोकने के लिए आपको 5 से 30 सेकण्ड्स का टाइम सेलेक्ट कर सकते है।
७. अब आप एक बार टाइम सेलेक्ट करके नीचे की तरफ स्क्रॉल करके Save Changes पर क्लिक करे अब आपके निर्धारित टाइम के अंदर आपके द्वारा भेज गया ईमेल रोक सकते है।

Benefits of N.C.C. (National Cadet Corps)


Hello Friends if you are interested in Military Carrer than NCC can help you in choosing a best career in Military. NCC has emerged as part of our education. These two bodies have done a lot of good to our boys and girls. Apart from affording practical situations of learning lessons in discipline these foster among our boys and girls a sense of responsibility and a state of preparedness. At the time of our conflict with Pakistan our cadets did meritorious service to the county. Cadet at once rose to the occasion with a full sense of responsibility and risk. They knew their job, without much ado they went into action. They proved to be the third of deference. But all students are not fit for military services. 
Most of boys who undergo this training in schools and colleges come out disciplined, hardened young men to face life's harzards. They do not propose to take up a military career but the training stands them in good stead even in other spheres of life. 
But for those who intend joining the army this training is of the greatest importance. The choice of a profession depends much on one's inclination and attitude. One's interest is of fundamental importance in choosing a profession.
Soldier’s training can never be started too early. The curlier it starts the better. He should imbibe all these qualities which are necessary, at this impressionable age. These qualities than will become a part of his nature. 
The back ground to the solider is more important than his ability to fire a gun. He should be a full solider in looks and reality. If we join the army we will be benefited. It is on this principal that sainik schools have been started in different parts of our country. NCC is the basic idea behind them.
NCC can thus, give us the required training and the needed equipment for army life. Many of these cadets have already joined the forces and are serving the country in one position or the other. Many more will follow. The need of the country is great and desire of the young men to serve the country is great.

पेन ड्राइव में पासवर्ड कैसे लगाये (How To Make Pen Drive Password Protected)

दोस्तों क्या आपको पता है की आपकी पेन ड्राइव को पासवर्ड प्रोक्टेक्टेड कैसे करे अगर नहीं तो मैं आज आपको बताऊंगा की आप बिना किसी सॉफ्टवेयर के अपनी पेन ड्राइव को कैसे सुरक्षित कर सकते है बस आपको कुछ आसान से स्टेप्स को फॉलो करना होगा।  जिनको फॉलो करने के बाद आप अपनी पेन ड्राइव को पासवर्ड बना पाएंगे। आप अपनी पेन ड्राइव में इम्पोर्टेन्ट डाटा सुरक्षित रखते है। और आप कहते है की आपकी इम्पोर्टेन्ट जानकारी को कोई चोरी ना कर पाए तो इसके लिए आपको आपने कंप्यूटर में उपस्थित Bitlocker प्रोग्राम का प्रयोग करना होगा जिसे आप बहुत आसानी से कर सकते है। 

१. सबसे पहले आप अपनी पेन ड्राइव को कंप्यूटर में कनेक्ट करके उसे पूरी तरह स्केन कर ले। 
२. फिर Right Click करके Turn on Bitlocker ऑप्शन पर click करे। क्लिक करने के बाद एक विंडो खुलेगी और विंडो खुलकर खुद ही बंद हो जायेगी। उसके बाद प्रोग्राम स्टार्ट होगा। 
३. अब आपको दो ऑप्शन मिलिगे जिसमे आपको पेन ड्राइव को लॉक करने के लिए कुछ ऑप्शन आयेगे।  इन ऑप्शन में से आपको Use a Password to Unlock the Drive पर क्लिक करना होगा। 
४. फिर पासवर्ड सेट करके Next पर टैप करे। इसके बाद विंडो ओपन होगी जिसमे Bitlocker Recovery Key को Save कर लीजिये। 
५. फिर आपसे दो जगह पूछी जायगी। जहाँ पर आपके इस Recovery Key को Save करना चाहते है। अब आपको जहाँ भी आपको अपनी Recovery Key सेव करनी है उसे सेलेक्ट करके सेव कर ले। ये recovery key की आवश्यकता आपको तब होगी जब आप अपनी पेन ड्राइव का पासवर्ड भूल जायगे। 
६. फिर एक और विंडो ओपन होगी जिसमे आपको Next पर क्लिक करते रहना है जब तक की Start Encrypting ऑप्शन ना आ जाये। 
७. Eneryption ख़तम होने के बाद आपने पेन ड्राइव को कंप्यूटर से डिसकनेक्ट कर दे और फिर पेन ड्राइव को दोबारा कनेक्ट करे अब आपको पेन ड्राइव पासवर्ड माँगेगी। इस पासवर्ड में आप वो पासवर्ड इनपुट करे जो आपने सेट किया है। पासवर्ड इनपुट करने के बाद आपकी पेन ड्राइव ओपन हो जायगी। 

इस तरह आप अपनी पेन ड्राइव में पासवर्ड सेट करके पानी इम्पोर्टेन्ट जानकारी सुरक्षित रख रखते है। 

वो क्या है जो साल में एक बार, महीने मई २ बार, हफ्ते में ४ बार और दिन में ६ बार आती है?


Answer= "F"
हल:-
साल में 12 महीने होती है (January , February, March, April, May, June, July, August, September, October, November, December) इन 12 महीनो में से बस February में ही "F" आता है। 

एक महीने में 4 हफ्ते होते है (First, Second, Third, Fourth) इन चारो हफ़्तों में से केवल FIRST और FOURTH में ही "F" आता है

एक हफ्ते में सात दिन होती है (First Day, Second Day, Third Day, Fourth Day, Fifth Day, Sixth Day and Seventh Day) इन सातो दिनों में से केवल FIRST DAY, FOURTH DAY और FIFTH DAY में ही "F" आता है 
एक दिन में 24 घण्टे होते है (One, Two, Three, Four, Five, Six, Seven, Eight, Nine, Ten.......Fourteen, Fifteen.......Twenty Four) इनमे 24 घण्टों में बस 5 घण्टो में ही "F" आता है।




Wo Kya Cheez Hai, Jo Saal mai 1 Baar, Mahine mai 2 baar, hafte mai 4 Baar or Din mai 6 baar ati hai? 

Answer= "F" 

Saal mai 12 mahine hote hai January se December tak. In 12 Mahino mai bas Faebruary mai hi "F" aata hai any kisi month mai nahi.

Ek mahine mai 4 weeks hoti hai first, second, third, fourth, in charo weeks mai keval First or Fourth week mai he "F" aata hai.

Ek week mai 7 din (first day, second day, third day, fourth day, fifth day, sixth day and seventh day.) hote hai. In 7 Days mai se bas First, Fourth, Fifth Days me he "F" aata hai.
Ek din mai 24 Ghante hote hai in 24 ghanto mai se keval  (four, five,fourteen, fifteen, twenty four) mai hi "F" aata hai.

उल्टा चलने वाला विचित्र पक्षी - वुड पैकर (Wood Pecker)

दोस्तों आपने  बहुत से पक्षी देखे होंगे पर कभी कोई इस भी पक्षी  देखा है जो उल्टा  चलता है , आज मैं आपको एक ऐसे ही पक्षी के बारे में बताऊंगा जो उल्टा चल सकता है  इस पक्षी का नाम है "वुड पैकर" यह पक्षी भारत और ऑस्ट्रेलिया के जंगलो में पाया जाता है. वुड पैकर विश्व का एकमात्र ऐसा पक्षी है जो उल्टा चल सकता है . इस पक्षी में उल्टा चलने की अदभुत प्रतीभा है . इस पक्षी की आवाज भारत की मेना पक्षी से काफी मिलती जुलती है लेकिन आपको ये भी बता दू  की इस पक्षी का नाम वुड पैकर ही क्यों पड़ा और हम इसे वुड पैकर (Woodpecker) या कठफोड़वा (Kathfodwa) नाम से ही क्यों जानते है वैसे तो आपको भारत में बहुत से रंगों के वुड पैकर पक्षी मिलेंगे इस पक्षी का पीठ वाला हिसा सुनहेरा होता है इसकी आवाज तेज और करकस होती है और ये पक्षी जब भी उड़ता है तो एक विचित्र सी आवाज करता है दरअसल ये पक्षी भारत में कठफोड़वा नाम से प्रसिद्ध है.
इस पक्षी का नाम कठफोड़वा या वुड पैकर पड़ने का कारण सिर्फ यही है कि ये पक्षी पेड़ के तनो की लकड़ी को छेदकर उसमे छिपे हुए कीड़ो को खाता है .