नकली नोट मिलने पर क्या करना चाहिए- (What To Do When You Get Fake Currency)

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नकली नोट रखना गैर क़ानूनी होता है। लेकिन कई बार आपके पास अनजाने में नकली नोट आ जाते है। कई बार ऐसा होता है की आप बैंक में पैसे जमा करने जाये तो पता चलता है की उसमे एक दो नोट नकली है। बस अब क्या है आप एकदम घबरा जाते है कि आपके खिलाफ कोई क़ानूनी कार्यवाही न हो जाये लेकिन ऐसे में आपको ज्यादा घबराने की जरुरत नहीं है। रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के डिप्टी गवर्नर एच आर खान के मुताबिक , अगर किसी के पास 5 तक नकली नोट मिलते है तो उसके लिए F.I.R. दर्ज करने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। इसके लिए ग्राहक या फिर बैंक को हर जिले में स्थित एक अनुसूचित थाने में सूचना भर देना काफी होता है। उन्होंने कहाँ की पुलिस के डर से बड़ी संख्या में लोग नकली नोट मिलने के बाद भी सामने नहीं आते है। इसी के चलते भारतीय रिज़र्व बैंक ने ये कदम उठाया है। कई बार लोगो के साथ ऐसा होता है कि जब वे बैंक के A.T.M. में जाते है तो उन्हें जाली या कटे फाटे नोट मिलते है ये नोट ग्राहक के लिए समस्या बन जाते है ऐसे में बैंक उन्हें लेने से इनकार कर देता है लेकिन अब इस समस्या का हल निकल आया है। अब इस तरह के नोटो के लिए A.T.M. सम्बंधित बैंक ही जिम्मेदार होगा साइबर सोसाइटी के सयुक्त सचिव एस० एन० रामचन्द्रन ने कहाँ की अब बैंको को ये जिम्मेदारी लेनी होगी। A.T.M. से निलके जाली नोटो के लिये वह बैंक ही जिम्मेदार है और ग्राहक को इसकी शिकायत तुरन्त बैंक को कर देनी चाहिए।

भारतीय रिज़र्व बैंक के बारे में रोचक तथ्य - (About Reserve Bank of India)

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भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना  1 अप्रैल 1935 को Reserve Bank of India Act . 1934 से तहत की गयी थी। 
स्थापना के समय रिज़र्व बैंक का कार्यालय कलकत्ता में था लेकिन 1937 में यह मुम्बई में कर दिया गया। प्रारम्भ में रिज़र्वे बैंक एक प्राइवेट बैंक था। जिसे सन 1949 में राष्ट्रीयकरण होने के बाद यह सरकारी स्वामित्व में आ गया। आज रिज़र्वे बैंक भारत सरकार का बैंक है। 
 Reserve Bank of India हमारे देश का Central Bank है। Reserve Bank का सबसे प्रमुख कार्य नोट निर्गमन (Issuing of Notes) है। इसके अतिरिक्त Reserve Bank सभी बैंको के बैंक की तरह कार्य करता है। देश में मौद्रिक स्थिति (Monetary Stability) बनाये रखने हेतु आवश्यक कदम उठता है। देश की आर्थिक स्थिति पर नजर एवं नियन्त्रण रखना भी रिज़र्व बैंक का कार्य है। 
भारतीय रिज़र्व बैंक के पहले गवर्नर Sir Osborne Smith थे। ये बहुत ही अनुभवी बैंकर थे। लेकिन Exchange Rate और Rate of Interest के मुद्दों पर उनकी सहमति न बन पाने के कारण उन्हें अपना समय पूरा होने से पहले ही त्याग पत्र देना पड़ा था।  वे 1 -4 -1935 से 30 -06 -1937 तक रिज़र्वे बैंक के गवर्नर रहे। भारतीय रिज़र्व बैंक के मोनिटरज़ेशन के समय भारतीय रिज़र्वे बैंक के गवर्नर सीडी देशमुख थे। बाद में ये भारत के वित्त मन्त्री बन गए। 
भारतीय रिज़र्वे बैंक के कार्य:-
१. भारतीय रिज़र्वे बैंक द्वारा जारी नोटों के निर्गमन का नियमन तथा मौद्रिक स्थिति बनाये रखने हेतु आवश्यक रिज़र्व रखता है। 
२. देश के आर्थिक स्थिति बनाये रखने हेतु रिज़र्व बैंक के द्वारा आवश्यक निर्णय लिए जाते है। 
३. भारतीय रिज़र्व बैंक सभी बैंको पर भारत सरकार के बैंकर्स के तरह कार्य करते हुए , सार्वजनिक ऋण, Foreign Exchange का नियमन के कार्य करता है। 
४. भारतीय रिज़र्व बैंक आर्थिक स्थिति बनाये रखने हेतु Inflation को नियन्त्रित करने हेतु सभहि बैंको पर Cradit Policy एवं अन्य परिपत्रो द्वारा नियन्त्रण रखता है। 
५. भारतीय रिज़र्व बैंक सभी बैंको का बैंक है एवं इसे Tender of the last resort भी कहाँ जाता है।

टेलीविज़न के आविष्कारक - जॉन लॉगी बेयर्ड (Father of Television John Logie Baird)

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जान लॉगी बेयर्ड  जन्म ब्रिटेन में ग्लास्गो कके समीप हेलन्सबर्ग में हुआ था। इनके पिता शिक्षित पादरी थे। बेयर्ड को फोटोग्राफी में बहुत रूचि थी। अपनी शिक्षा पूरी करने  के बाद ख़राब सेहत के चलते उन्होंने अपने एक दोस्त के पास जाने का फैसला किया। अपने द्वारा बनायीं गयी चीजो की साथ वो रवाना हो गए। अपनी यात्रा के दौरान रेडियो केबिन के ऑपरेटर से उनकी अच्छी दोस्ती हो गयी। उन्होंने विचार बना लिया की क्यों न बिजली की मदत से हवा  के माध्यम से तस्वीर भेजी जाये। बेयर्ड सन 1922 में लन्दन लौटे। रोजी थी नहीं और पैसा काम था। इसके बावजूद उन्होंने टेलेविज़न के अविष्कार की रुपरेखा बनाली और काम में जुट गये। उन्होंने चाय , बिस्कुट, और टोप रखने के पुराने डिब्बे खरीदे , कबाड़िये से बिजली की पुरानी मोटर ली और प्रोजेक्शन लेम्प , सिलेनियम सेल , नियॉन लैम्प एवं रेडियो वाल्व आदि टूटे फूटे उपकरणों की मदत से टेलीविज़न ट्रांसमीटर और रिसीवर बनाने में जुट गए। उन्हें पहली सफलता सन 1924 की वसंत में मिली , जब वे एक छाया को तीन गज तक प्रसारित करने में सफल रहे। आगे के प्रयोग के लिए पैसे न होने से उन्होंने अखबारों में इस्तिहार छपवाये तो कुछ धन की आमद हुई। लन्दन में धनाड्य व्यवसायी गार्डन सेलफ्रिज के बेटे ने भी मदत की बात की। बेयर्ड ने प्रसारण का प्राथमिक प्रदर्शन सेलफ्रिज की दुकान में ही किया। 2 अकटूबर 1925 को बेयर्ड रोमांचित हो उठे।  उन्होंने अपने यन्त्र में प्रकाश को विद्युत किरणों में बदलने का उपकरण लगाकर स्विच न किया तो पाया की दृश्य हूबहू उभर आया है। चेहरे पर सफल प्रसारण के बाद उन्होंने सन 1926 में लन्दन में रॉयल इंस्टिट्यूशन में चलते फिरते टेलीविज़न के चित्रो के प्रेषण का प्रदर्शन किया। 1928 में उन्होंने एक कदम आगे बढकर रंगीन टेलीविज़न के बनाने का प्रयोग आरम्भ किए। और 1929 में जर्मन पोस्ट ऑफिस में टीवी सेवा के लिए अपनी सेवाएं प्रदान की।  कालान्तर में मारकोनी ने बेयर्ड को पीछे छोड़ दिया। आर्थिक तंगी के शिकार और बीमार होने के बाद बेयर्ड ने 57 वर्ष की उम्र में ससेक्स में दम तोड़ दिया। वे अपने जिंदगी के आखरी पालो तक रंगीन टेलीविज़न के प्रयोग में लगे रहे। उनके अविष्कार का ही परिणाम है की आज पूरी दुनिया में  टेलीविज़न एक जरुरत न गया है। 

कम्प्यूटर माउस के प्रकार (Types of Computer Mouse)

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वर्तमान में माउस के बिना कम्प्यूटर पर वर्क करना बहुत ही कठिन काम है आज माउस कंप्यूटर का एक अति इम्पोर्टेन्ट पार्ट बन गया है। आज बाजार में विभिन प्रकार के माउस उपलब्ध है। यहाँ हम आपको माउस के विभिन्न प्रकारो के बारे में बतायेगे। 
1. सामान्य माउस:-
इन माउस का सबसे ज्यादा प्रयोग होता है। इन माउस  केबल होती है जिसकी सहायता से ये कम्प्यूटर से जुड़े होते है। ये वे माउस है जिन्हें सामान्यतः कम्प्यूटर के साथ देखते है।

2. वायरलेस माउस:-
ज्यादातर कम्प्यूटर माउस कम्प्यूटर जुड़ने के लिए रेडियो फ्रेकवेंसी प्रयोग करते है। इन माउस में एक ट्रांसमीटर और एक रिसीवर लगा होता है। ट्रांसमीटर आपके हाव भाव को पहचानकर सिग्नल के द्वारा कम्प्यूटर तक सिग्नल भजता है और जो रिसीवर कम्प्यूटर से जुड़ा होता है। उस सिग्नल को पकड़ता है और उस सिग्नल को कम्प्यूटर की लेंगुएज में बदलकर आपके माउस ड्राइवर तक भजता है जिसके आधार पर कम्प्यूटर डेस्कटॉप पर माउस काम करता है। 
3. ब्लूटूथ माउस :-
ब्लूटूथ माउस भी रेडियो फ्रीक्वेंसी पर वर्क करते है। ब्लूटूथ तकनीक के द्वारा आप केवल माउस को ही नहीं बल्कि प्रिंटर, हेडसेट, कीबोर्ड आदि यंत्रो को भी कम्प्यूटर से आसानी से जोड़ सकते है। इसके लिए आपके कम्प्यूटर ब्लूटूथ अडॉप्टर का होना आवश्यक है। ताकि कम्प्यूटर में ब्लूटूथ चल सके और वो ब्लूटूथ के सिग्नल को रिसीव कर सकते। ब्लूटूथ माउस की रेंज लगभग 10 मीटर तक होती है। 
4. RF माउस:-
इसके माउस के लिए एक रिसीवर को USB की तरह अपने कम्प्यूटर में लगाना होता है ये सिर्फ आपके उस कम्प्यूटर माउस के ही सिग्नल को लेगा जिसको आपने कम्प्यूटर के साथ कनेक्ट किया है। ये माउस 30 फीट तक की दुरी तक वर्क कर सकते है। 
5. बायोमैट्रिक माउस:-
ये माउस एडवांस माउस होते है इन माउस को सुरक्षा की दृष्टि को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। ये टेक्नोलॉजी बस उस माउस को वर्क करने किए अनुमति देता है। जिस माउस को आपके कंप्यूटर में मान्यता प्राप्त हो। इसमें आपके फिंगर प्रिंट को भी सिग्नल के रूप में लिया जाता है। ताकि आपके माउस  को आपके  अलावा को और न प्रयोग कर सके। इस माउस को इस्तेमाल करने के लिए आपको अपने कंप्यूटर में एक सॉफ्टवेयर इनस्टॉल करना होता है जो कि आपको इस माउस को खरीदते समय माउस के साथ मिलेगा। आपको इस सॉफ्टवेयर को install करके अपने फिंगर प्रिन्ट को रजिस्टर करके स्टोर करे।और आपने माउस को आसानी से इस्तेमाल कर सकते है।

पेन ड्राइव को कम्प्यूटर पासवर्ड की तरह प्रयोग करे - Use Your Pen Drive As A Password

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यदि आप अपने कम्प्यूटर सिस्टम को सिक्योर करना कहते है और आप ये चाहते है की आपके कम्प्यूटर सिस्टम पर आपके अलावा को अन्य वर्क न करे। तो इसके लिए अनेक तरीके प्रयोग में लाये जाते है। जैसे कम्प्यूटर पर पासवर्ड का प्रयोग करना आदि। क्या आपको पता है की आप अपनी पेन ड्राइव को भी कंप्यूटर पासवर्ड की तरह प्रयोग कर सकते है। अगर नहीं तो आज मैं आपको ऐसे ही कुछ तरीको को बताने जा रहा हूँ जिनके प्रयोग से आप अपने सिस्टम को सिक्योर कर सकते है। 
USB Pen Drive से आपने कम्प्यूटर सिस्टम को सिक्योर करने  के लिये आप दो तरीको का प्रयोग कर सकते है। 
1. प्रीडेटर सॉफ्टवेयर:
इस सॉफ्टवेयर की सहायता से आप अपनी पेन ड्राइव को एक Key को तरह प्रयोग करके अपने कम्प्यूटर को लॉक कर सकते है। ज्यादातर लोग सीधा लॉगिन का प्रयोग करते है। कुछ लोग पासवर्ड का प्रयोग करते है। लेकिन आज के समय में टेक सेवी लोग प्रीडेटर का प्रयोग कर रहे है। इसे आप www.predator-usb.com से जाकर या https://www.predator-usb.com/predator/en/index.php?n=Main.DownloadHome लिंक पर क्लिक करके डाउनलोड कर सकते है। और installation के बाद आप इसे Start Menu > All Program > Predator से लॉन्च कर सकते है। एक डायलॉग बॉक्स के द्वारा आपसे पासवर्ड एन्टर करने के लिए तथा USB फ्लैश ड्राइव तैयार करने के लिए कहाँ जायेगा। अब आपको अपनी पेन ड्राइव को लगाकर OK करे। ध्यान दे कि मौजूदा कंटेन्ट्स को इस ड्राइव में बदला नहीं जायेगा। Preferences Window में New Password फील्ड में अपनी पसन्द का पासवर्ड इनपुट करे।  इस पासवर्ड का प्रयोग USB Drive के खो जाने की स्थिति में सेशन को अनलॉक करने के लिये किया जायेगा। पासवर्ड केस सेन्सिटिव है और आपको कम से कम 6 लेटर्स, फिगर्स  या साइन्स का प्रयोग करना होगा। अब क्रिएट बटन पर क्लिक करके ओके करे। इस प्रकार आप अपने सिस्टम को प्रोटेक्ट कर सकते है। आप आपका कंप्यूटर आपके द्वारा तैयार की गयी पेन ड्राइव के प्रयोग से ही ओपन होगा। 
2. सिसकी:-
कम्प्यूटर विंडोज में इनबिल्ट सिस्टम यूटिलिटी Syskey भी दी गयी होती है।  यह आपको अपनी पेन ड्राइव को सामान्य टेक्स्ट आधारित पासवर्ड की बजाय एक्सेस डिवाइस की तरह प्रयोग करने में सहायता करती है। इसे करने के लिए पहला स्टेप इसे Removable Disc की तरह A: Drive लेटर असाइन करना है। ये लेटर सामान्यतः फ्लॉपी ड्राइव के लिए प्रयोग किया जाता है। इसके बाद Window Key प्रेस कर Syskey टाइप करे और Enter करे। अब फ्लॉपी डिस्क पर अपडेट स्टोर की पर क्लिक करे।  और ओके पर क्लिक करे। इसके बाद आपकी पेन ड्राइव पर Statkey.key नामक फाइल क्रिएट हो जायेगी। अब आपका कम्प्यूटर बिना इस  पेन ड्राइव के लगाए बूट नहीं करेगा। 

पेन ड्राइव - (About Pen Drive)

पेन ड्राइव के बारे में सभी जानते है। सन 2000 में IBM और ट्रेक के द्वारा बनायी गयी थम्ब ड्राइव बहुत ही फेमस हुई थी। ये एक बहुत ही अदभुत गैजेट था। इस थम्ब ड्राइव के आ जाने के बाद 1970 के प्रचलित फ्लॉपी ड्राइव  प्रचलन से बाहर हो गयी थी। अब फ्लॉपी की जगह थम्ब ड्राइव ने ले ली थी। दुनिया की पहली थम्ब ड्राइव 8 mb स्टोरेज से आरम्भ हुई थी।जो IBM कम्पनी के द्वारा बनायी गयी थी। लेकिन आज 4 GB, 8 GB, 16 GB, 32 GB और 512 GB में भी पेन ड्राइव उपलब्ध है। इन पेन ड्राइव की बनावट और स्टोरेज के कारण इनके अधिक उपयोग के रस्ते खुल गये है। 

बड़ी विडियो फाइल को छोटे साइज में कैसे कनवर्ट करे - How To Compress Video Files on PC

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आज के समय में डाटा की बढ़ती लिमिट को देखते हुए उसे स्टोर करने की समस्या सामने आने लगी है। जिसके लिए अधिक स्पेस की जरुरत महसूस होने लगी है। और अधिक स्पेस की हार्ड डिस्क का इस्तेमाल होने लगा है। बड़ी फाइल्स को यदि कंप्यूटर में स्टोर करके रखा जाये तो वो हार्ड डिस्क में अधिक स्पेस घेरती है। स्पेस की समस्या की कम करने के लिए इन फाइल्स कम्प्रेस करके रखना सबसे अच्छा तरीका है। इससे बड़े साइज की फाइल्स को छोटे साइज में कम्प्रेस किया जा सकता है। साथ ही इन फाइल्स को आसानी से ट्रान्सफर भी किया जा सकता है। यदि आप अपनी बड़े साइज की फाइल को कॉम्प्रेस करना चाहते है तो इसके लिए आपको WINRAR सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होगी। 
फाइल को कम्प्रेस कैसे करे:
आपको जिस फाइल फाइल या फोल्डर को कम्प्रेस करना है उस फोल्डर या फाइल पर माउस के राईट क्लिक करे और Add to Archive को सेलेक्ट कर ले ऐसा करने से आपके सामने एण्ड विण्डो ओपन हो जाएगी।  इस विण्डो में कॉम्प्रेस से सम्बंधित  कई सारे ऑप्शन आयेगे जहाँ Compression Method में अगर आप Normal Mode के बजाये Best Mode चुनेगे तो आपकी फाइल ज्यादा कॉम्प्रेस्ड हो जायेगी यानी बहुत कम साइज की हो जायेगी और अगर केवल स्टोर को चुनेगे तो केवल Zip में बदल जायेगी। 
अपनी फाइल या फोल्डर को पासवर्ड से सुरक्षा पासवर्ड सिक्योरिटी देने के लिए जब आप Add to Archive करे तब खुली हुई विण्डो  Set Password पर क्लिक करे और पासवर्ड लगाये तो यहाँ Encrypt File Names पर टिक अवश्य लगाइये इससे क्या होगा कि आपकी RAR के अन्दर क्या है। यह बिना पासवर्ड डाले कोई नहीं देख पायेगा। यदि आपमें Encrypt file Names पर टिक नहीं लगाया है तो फाइल धुलेगी तो नहीं पर ये पता लगाया जा सकता है या देखा जा सकता है। कि आपने कोनसी फाइल  कम्प्रेस किया है। 
अपनी कम्प्रेस फाइल को कैसे खोले :-
कम्प्रेस की गयी फाइल पर राईट क्लिक कीजिये और Extract Home या Extract to file name पर क्लिक कीजिये। इन दोनों ऑप्शन किए अलग अलग काम है। अगर आप Extract Here पर क्लिक करते है। तो कम्प्रेस्ड फाइल के अन्दर की  सभी फाइल्स वही Extract हो जायेगी और अगर आप Extract to File Name पर क्लिक करते है। तो एक फोल्डर में आपकी सारी फाइल Extract हो जाती है।

वीर विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) - Veer Savarkar

 देश भगत वीर सावरकर स्वतन्त्रता संग्राम के अमर सेनानी विनायक दामोदर सावरकर का जन्म 28 मई 1883 को ग्राम भगूर जिला नासिक महाराष्ट्र में हुआ था। इनकी पिता श्री दामोदर सावरकर बड़े देशभगत, विद्याप्रेमी , सुसंस्कृत एवं प्रतिष्ठित व्यक्ति थे। इनकी माता श्रीमति राधाबाई बहुत विनम्र , परोपकारी  और धर्मनिष्ठ महिला थी। रामायण , महाभारत और केसरी साप्ताहिक समाचार पत्र का वचन अनुवचन उनके आंगन में प्रतिदिन आयोजित होता था। जिसमे गांव के ज्यादातर लोग सम्मिलित होते थे जिसके फलस्वरूप विनायक और उनके भाई गणेश सावरकर के मन में राष्ट्रीयता के एक अमिट छाप अंकित हो गयी थी। 
मेट्रिक के परिक्षा पास करके सावरकर ने 1902 में फगुर्सन कॉलेज पूना में प्रवेश लिया। अंग्रेजो के द्वारा बंगाल के विभाजन से देशभर में क्रोध के लहर दौड़ गयी। कॉलेज के सभी विद्याथियो ने भी विरोध में विनायक के साथ समस्त विदेशी वस्तुओ के बहिष्कार की प्रतिज्ञा करते हुए 7 अकटूबर 1905 की मध्यरात्रि को विशाल जनसमूह के समक्ष विदेश वस्तुओ की होली जलाई।  जिसके परिणाम स्वरूप सावरकर को उनके छात्रावास से बाहर निकल दिया गया और उन्हें आर्थिक अर्थदण्ड भी दिया गया। 
अच्छे वक़्ता , प्रतिभाशाली कवि और सिद्धहस्थ लेखक के रूप में सुविख्यात वीर सावरकर जी स्नातक पूर्ण करके कानून के पढ़ाई के लिए मुम्बई पहुँचे। वहाँ उन्होंने "अभिनव भारती" नमक क्रन्तिकारी नवयुवको की संस्था गठित की। 19 जून 1906 को लन्दन जाकर वहाँ स्वदेशाभिमानी भारतीयों के साथ मिलकर "स्वतंत्र भारत समाज" की स्थापना की तथा चुनिंदा लोगो को "अभिनव भारती" का सदस्य भी बनाया गया। 
इंग्लैंड के समाचार पत्रो में वे भारत की परिस्थिति को उजागर करने वाले लेख लिखते थे। "1857 का स्वतंत्रता संग्राम"  नामक तेजस्वी ग्रन्थ भी लिखे , जिन्हें अंग्रेज सरकार ने राष्ट्रीय विरोध कहकर जब्त कर लिया। लन्दन में ही 10 मई 1908 को "स्वतंत्र भारत समाज" की और से सन 1857 की क्रांति का पचासवाँ स्मृति दिवस आयोजित करके देशभगत वीरो के संकल्पो को पूरा करनी की सपथ लेकर ध्वज फहराया गया। भारतीय क्रांति के सूत्रधार के रूप में सावरकर को गिरफ़्तार करने के लिए अंग्रजो ने बहुत प्रयास करने जारी कर दिए। वीर सावरकर के भाई गणेश सावरकर को कालापानी की सजा देकर अण्डमान भेज किया गया। 
30 जनवरी 1911 को विनायक सावरकर को दोहरे कालापानी की सजा अर्थात अण्डमान को जेल की काल कोठरियों में 50 वर्ष की सजा सुनाई गई।  उस समय उनकी उम्र मात्र 28 वर्ष की थी।  दिन भर कठोर श्रम व रात्रि में कोयले से कोठरी की दीवार पर शहीदों के काव्यात्मक आलेख लिखकर उनको वे तत्काल कंठस्थ कर लेते थे। 
16 जनवरी 1924 को वीर सावरकर को इस सशर्त कारगर से मुक्त कर दिया गया। 10 मई 1937 को उनकी  शर्तबद्धता समाप्त हो गयी।  स्वतंत्रता प्राप्ति के अथक प्रयासों के बाद 15 अगस्त 1947 को मध्यरात्रि को भारत स्वतन्त्र हुआ और 26 जनवरी 1966 को 83 वर्ष की  उम्र में देशभगत विनायक दामोदर सावरकर गॉलोसवासी हो गए।  उनके देश के प्रति किये गए योगदान को पूरा देश भुला नहीं पाया है। ये एक ऐसे वीर थे जिन्होंने अपना सारा जीवन देश को समर्पित कर दिया।

गुरुत्वाकर्षण के सिद्धान्त के प्रतिपादक - आइजक न्यूटन (Isaac Newton Biography)

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आइजक न्यूटन को भौतिकी के जन्मदाता के रूप में जाना  जाता है। विश्व के महान वैज्ञानिक आइजक न्यूटन गुरुत्वाकर्षण के सिद्धान्त का प्रतिपादन किया , इन्होंने गति के तीनो नियमो का पता लगाया , तरंगो की गति का पता लगाया , इन्होंने कैल्कुलस का अविष्कार किया और गणित सम्बंधित अनेको खोज की। भौतकी के जन्मदाता न्यूटन का जन्म इंग्लेंड में लिंकन शायर के वूल्स्थोर्पे नमक गांव में  हुआ था। उसी वर्ष महान वैज्ञानिक गेलेलियो की म्रत्यु हुई थी। क्रिसमस के दिन जन्मे आइजक के बचपन की उमीदे कम थी।  इनकी माँ विधवा थी। जिन्होंने दोबारा से शादी कर ली थी। और आइजक न्यूटन को उनकी दादी के यहाँ भेज किया। जहा आइजक  दिन रात पढता रहा। वो किभी चक्की तो कभी घड़ियों के मॉडल बनाता , चित्रो की नकले करता और फूल फल और जड़ीबूटियां एकत्र करता था। जो वो 14 वर्ष का हुआ तो वो अपनी माँ के पास आ गया। क्योंकि उनकी माँ फिरसे विधवा हो गयी थी। अपनी माँ के पास खेती बड़ी में आइजक का मन नहीं लगा। 18 वर्ष  उम्र में उसे केम्ब्रिज विश्विद्यालय के ट्रिनिटी कॉलेज में भर्ती करा दिया गया। वहां से उन्होंने 1865 में B.A. की उपाधी प्राप्त की। एक गणित के अध्यापक बैरो ने उनकी प्रतिभा की पहचाना , और प्रोत्साहित किया और अपना उत्तराधिकारी कैम्ब्रिज में उन्हें गणित का प्रोफेसर बना दिया। बगीचे में पेड़ से गिरे सेब को देखकर उन्होंने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धान्त के प्रतिपादन किया कि पृथ्वी सभी वस्तुओ को अपने केंद्र की और खिंचती है। उन्होंने गुरुत्वाकर्षण के ब्रह्माण्डव्यापी नियम भी बताया कि ब्रह्माण्ड के सभी पिण्ड पारस्परिक आकर्षण के कारण अंतरिक्ष में लटके हुए है। उन्होंने बताया की हर वस्तु दूसरी वस्तु को आकर्षण बल से खिंचती है। न्यूटन ने गणित  कैलकुलस की नीव डाली। उन्होंने गणित के तीनो नियमो की खोज की और उन्होंने बताया की हर भौतिक क्रिया की विपरीत प्रतिक्रिया  है। न्यूटन ने सबसे भले प्रिज्म के जरिये पता लगाया कि सफ़ेद रंग सात रंगों से मिलकर बना होता है। उन्होंने प्रकाश सम्बन्धी सिद्धान्त "ऑप्टिकल" और अन्य सभी "प्रिसिपिया"में प्रकाशित है। सर न्यूटन को बतौर विश्विद्यालय प्रतिनिध पार्लियामेंट के लिए चुना गया। अपने अंतिम समय में वे खगोलीय पिण्डों पर बहुत महवपूर्ण काम कर रहे थे। 85 वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु हो गयी। इनके महान खोजो का पूरा विश्व हमेशा आभारी रहेगा। इनके योगदान की वजह से आज अनेको खोजे संभव हो पायी है।
 

अल्बर्ट आइंस्टीन - Albert Einstein Biography in Hindi

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नोबेल पुरस्कार विजेता अल्बर्ट आइंस्टीन का जन्म जर्मनी के उल्म में एक यहूदी परिवार में हुआ था। 1905 में उन्होंने ज्यूरिख विश्विद्यालय से P.Hd की उपाधि हासिल की और भौतिक सम्बंधित अपने अनुसंधानों पर अन्तराष्ट्रीय सोध पत्रिका में अपने 5 सोध छपवाये जिससे उन्हें बहुत प्रसिद्धि मिली। 40 साल बाद एटम बम का अविष्कार हो सका। उनका पहला पत्र फोटोइलेक्ट्रोनिक इफ़ेक्ट पर आधारित था और दूसरा ब्राउनियन गति पर आधारित था। तीसरे पत्र में उन्होंने सापेक्षता का सिद्धान्त प्रस्तुत किया। चौथे पत्र में उन्होंने द्रव्यमान और ऊर्जा की समतुल्यता का क्रन्तिकारी विचार प्रस्तुत किया था। और अंतिम पत्र में उन्होंने प्रकाश के संचरण का फोटोन सिद्धान्त प्रस्तुत किया। उनकी मूल स्थापनायें थी प्रकाश की गति हर हल में अपरिवर्तनीय है द्रव्यमान, दुरी , और समय जैसी भौतिक रशिया बदलती रहती है। और द्रव्य को ऊर्जा में तथा ऊर्जा की द्रव्य में बदला जा सकता है। उन्होंने कहा की थोड़े से द्रव्य से अधिक ऊर्जा का विसर्जन होगा जिसका उपयोग मानव सृजन में या संहार में किया जा सकता है। उनके फॉर्मूले के मुताबित पदार्थ से उनके द्रव्यमान को प्रकाश की गति के वर्ग से गणित फल के बराबर ऊर्जा प्राप्त होगी। यानी एक टन पदार्थ से 70 लाख टन डायनामाइट  दहन की ऊर्जा। 1933 में जर्मनी पर हिटलर के काबिज होने के बाद वे अमेरिका चले गए। 1939 में उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रीपति रूजवेल्ट को पत्र लिखा , जसमे अमेरिकी परमाणु बम का रास्ता खोल दिया। लेकिन हिरोशिमा और नागासाकी हादसे से वे बहुत दुखी हुए। इजराइल का राष्ट्रपति बनने का ऑफर उन्होंने ठुकरा दिया। 1950 में उनका  यूनिफार्म फिल्ड का सिद्धान्त प्रकाशित हुआ। इसमें उन्होंने गुरत्वाकर्षण और विद्युत चुम्बकीय खोजो को सूत्रों में पिरो दिया। 76 वर्ष की आयु में उनकी मृत्य हो गयी। लेकिन  अमूल्य योगदान को पूरा विश्व भुला नहीं पाया। उनके परमाणु ऊर्जा सम्बंधी सोध के प्रणेता इस महानतम वैज्ञानिक का मस्तिष्क भावी पीढियो के लिए प्रिस्टन अमेरिका में सुरक्षित रखा गया है। 

टेलीफोन के जन्मदाता अलेक्जेंडर ग्राहम बेल - Father of Telephone

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टेलीफोन के जन्मदाता अलेक्जेंडर ग्राहम बेल का जन्म स्काटलैंड के एडिनबरा में हुआ था। और इनका पालन पोषण अमेरिका के मैसासुचेस्ट में बोस्टन में हुआ था। अपने जीवन में वे ऐसे यंत्र को बनाने में जुटे रहते थे जिससे भरे बच्चो को सुनने में मदत मिल सके। इन सब इसके साथ साथ वे टेलीग्राफ के सुधार में भी जुटे रहते थे। इन दोनों कामो के मिले जुले रूप से ही उन्हें टेलीफोन जैसे यन्त्र की खोज करने में कामयाबी मिली। एक बार ग्रहमबेल बेतार के तार यन्त्र के कारखाने में गए जहाँ उनकी मुलाकात इलेक्ट्रीक इंजीनयर थामस वाटसन से हुई।  जल्द ही दोनों की अच्छी दोस्ती हो गयी। ग्रहमबेल यंत्रो के नक्शे बनाते और वाटसन मॉडल बनाते थे। 2 जून 1875 बात है कि ग्रहमबेल वाटसन के साथ टेलीग्राफ सम्बंधित प्रयोग कर रहे थे। तार से कई सन्देश भेजने की धुन में उन्होंने सोचा की क्यों न ध्वनि सन्देश भेजा जाये। टेलीग्राफ के रिसीवर पर एक कमरे में ग्रहमबेल थे और दूसरे कमरे में वाटसन थे। सामान्य सन्देश के साथ वाटसन ने ऊँगली मरकर ध्वनि पैदा की तो वो ध्वनि ग्रहमबेल तक पहुँची। ख़ुशी से बदहवास होकर ग्रहमबेल भागते हुए वाटसन के कमरे में पहुँचे और जोर से चिल्लाकर बोले मेने तुम्हारी ऊँगली की आवाज सुनी है। इसके बाद उन्होंने कुछ और प्रयोग किया और एक ऐसा यन्त्र बनाने  में कामयाब हुए जिससे दुरी पर बैठे दो लोग आपस में एक दूसरे की आवाज सुन सकते थे। इस यन्त्र ग्रैहम बेल ने जो शब्द सबसे पहले बोले थे वो थे "वाटसन! वाटसन यहाँ आओ मुझे तुम्हारी जरुरत है।"  सन 1876 में ग्रहमबेल ने टेलीफोन बनाने का पेटेन्ट प्राप्त कर लिया और उसके अगले ही साल ग्रैहम बेल ने टेलीफोन कंपनी की नीव डाल दी। 75 वर्ष की आयु में जब उनकी मृत्य हुई तो सारे अमेरिका में उनको श्रद्धांजलि देने के लिए टेलीफोन एक मिनट के लिए बन्द रहे।