कंप्यूटर का इतिहास (History of Computer)

दुनिया भर में अब तक के ज्ञात श्रोतों के आधार पर ये पाया गया है की शुन्य की खोज और प्रयोग का सर्वप्रथम प्रमाणित उल्लेख भारत के प्राचीन विख्यात खगोल शास्त्री और गणितज्ञ आर्यभठ्ठ के द्वारा रचित उनके गणितीय खगोलशास्त्र ग्रंथ" आर्यभठ्ठीय" के संख्या प्रणाली में लेखों में शून्य के विशिष्ट संकेत मिलते है सबसे पहले इनके ग्रन्थ में ही शून्य को सम्मिलित किया गया था बस तभी से संख्याओं को शब्दों के रूप में प्रदर्शित करने के प्रचलन आरम्भ हुआ।
एक भारतीय लेखक जिनका नाम पिंगला था उन्होंने (200 ई.पू.) में छंद आपने शास्त्र का वर्णन करने के लिए, आर्यभट्ट द्वारा विकसित गणितीय प्रणाली को विकसित किया था और दो आधारीय अंक प्रणाली बाइनरी नंबर प्रणाली (०,१) का सर्वप्रथम ज्ञात विवरण प्रस्तुत किया गया | इन जादुई अंको (० और १ ) का ही प्रयोग प्रथम कम्प्यूटर की संरचना के लिए मुख्य रूप से किया गया था।
आज की कम्प्यूटर शब्द का प्रयोग आधुनिक कंप्यूटर के निर्माण से बहुत पहले से ही होता रहा है। पहले सामान्य में जटील गणनाओं को हल करने में उपयोग होने वाली मशीनों को संचालित करने वाले विशेषज्ञ व्यक्ति को ही "कंप्यूटर" नाम से पुकारा जाता था| ऐसे कठिन अंकगणित के सवाल जिनको हल करना बहुत मुश्किल और अधिक समय लेने वाला होता था। इन सवालो को हल करनें के लिए विशिष्ठ प्रकार की मशीनों का आविष्कार किया गया समय के साथ-साथ इन मशीनों में अनेक प्रकार के बदलाव तथा सुधार किये गए। जब जाकर आधुनिक कंप्यूटर का वर्तमान स्वरूप प्राप्त हुआ ये ये ही आधुनिक कंप्यूटर आविष्कार का प्रारंभिक क्रम था।
लगभग ३००० ई.पु. में अबेकस (ABACUS) नामक गणना करने वाले एक विचित्र यन्त्र का उल्लेख मिलता है ये माना जाता है की इस यंत्र का अविष्कार चीन में हुआ था। ABACUS नमक यंत्र में कई छडें होती थी जिनमें कुछ गोले के आकर की रचनाये होती थी। जिनके माध्यम से जोड़ और घटने का कार्य किया जाता था। परन्तु इनसे अबेकस के द्वारा गुणन और विभाजन का कार्य नहीं किया जा सकता था। ये भी कंप्यूटर के विकास क्रम का एक भाग है। |
१६०० ई० से लेकर 1970 ई० के बिच का समय कंप्यूटर के विकास में बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। जिस दौरान अनेक अविष्कार हुए जिनका सम्बन्ध कंप्यूटर विकास से है। जो कि निम्नप्रकार है।

(१) १६२२ ई० में महान विशेसज्ञ विलियम औघ्त्रेड ने एक यंत्र का निर्माण किया जिसे "स्लाइड रुल" के नाम से जाना जाता है।
(२) १६४२ ई० में महान वैज्ञानिक ब्लैज पास्कल नें "पास्कलिन" नमक एक यन्त्र का निर्माण किया जिसके द्वारा जोड़ने और घटना का कार्य किया जा सकत था।
 
(३) Leibniz's Stepped Reckoner or Stepped Reckoner:-
१६७२ ई० में गॉटफ्रीएड विल्हेल्म लाइब्निज़ (Gottfried Wilhelm Leibniz ) नमक वैज्ञानिक नेंलाइब्निज़ स्टेप रेकॉनर (Leibniz Step Reckoner or Stepped Reckoner) नामक एक कैलकुलेटर मशीन का निर्माण किया जिसके द्वारा जोड़, घटाना, गुना तथा भाग सभी प्रकार की गणनाएं करना सम्भवहुआ था।
(४) Difference Engine:-
१८२२ ई० में प्रसिद्ध वैज्ञानिक चार्ल्स बैबेज नें एक विचित्र विचित्र मशीन "डिफरेंशिअल इंजन" का निर्माण किया और फिर १८३७ ई० में एक और मशीन "एनालिटिकल इंजीन" का अविष्कार किया था जिसे वे धन की कमी के कारण पुरा नहीं कर सके थे। ये माना जाता है कि तभी से आधुनिक कंप्यूटर की शुरुवात हुई थी। इसी लिए वैज्ञानिक "चार्ल्स बैबेज" को "आधुनिक कंप्यूटर का जनक "कहाँ जाता है।
(५) Konrad Zuse - Zuse-Z3 Machine
१९४१ ई० में महान वैज्ञानिक "कोनार्ड जुसे" नें "Zuse-Z3" नमक एक अदभुत यंत्र का आविष्कार किया जो कि द्वि-आधारी अंकगणित की गणनाओ (Binary Arithmetic) को एवं चल बिन्दु अंकगणित गणनाओ (Floating point Arithmetic) पर आधारित सर्वप्रथम Electronic Computer था।

(6) Eniac:-
१९४६ में अमेरिका की एक सैन्य शौध शाला ने "ENIAC" (Electronic Numerical Integrator And Computer) नमक मशीन का निर्माण किया। जो कि दाशमिक अंकगणितीय प्रणाली (Decimal Arithmetic system ) संरचना पर आधारित था ये मशीन ही आगे चलकर सर्वप्रथम कंप्यूटर के रूप में प्रसिद्ध हुई जो कि आगे चलकर आधुनिक कंप्यूटर के रूप में विकसित हुई और आधुनिक कंप्यूटर के विकास का आधारबना।


(7) Manchester Small-Scale Experimental Machine
वर्ष १९४८ में Manchester Small-Scale Experimental Machine नाम का पहला ऐसा कंप्यूटर बनाया गया जो कि किसी भी प्रोग्राम को Vaccum Tube में संरक्षित (Save ) कर सकता था।


१. पहली पीढ़ी ( 1940-1956): - वैक्यूम ट्यूब
प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर में सर्वप्रथम वैक्यूम ट्यूब (Vacume Tube) नामक तकनीक का प्रयोग किया गया था। इन वेक्यूम ट्यूब की वजह से इन कंप्यूटर आकर बहुत बड़ा हो गया था। इनका आकर एक कमरे के जितना बड़ा था। कंप्यूटर का आकर बड़ा होने के कारण इन कंप्यूटर को चलने में बिजली की बहुत अधिक खपत होती थी। ये वेक्यूम ट्यूब बहुत ज्यादा गर्मी पैदा करती थी तथा इन वैक्यूम ट्यूब की टूट फुट की सम्भावना अधिक रहती थी। प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर में ऑपरेटिंग सिस्टम नहीं होता था। इन कंप्यूटर में प्रोग्राम को पंचकार्ड नामक डिवाइस में स्टोर किया जाता था। इन कंप्यूटर्स में गणना करने की क्षमता बहुत कम थी। इन कंप्यूटर्स में डाटा को स्टोर करने की क्षमता बहुत सिमित हुआ करती थी। इन कंप्यूटर्स में मशीन भाषा का प्रयोग किया जाता था
यूनिवेक तथा ENIAC कंप्यूटर पहली पीढ़ी के कंप्यूटर मशीनों उदाहरण है जिसे 1945 में बनाया गया था। ENIAC कंप्यूटर का वजन 30 टन के लगभग था। इसमें 18000 वेक्यूम ट्यूब्स, 1500 रिले, हजारो रजिस्टेंस और कैपिस्टर्स का प्रयोग किया गया था। इसके संचालन में 200 किलोवाट बिजली का उपयोग किया जाता था। यूनिवेक पहला कॉमेरशल कंप्यूटर (Comercial Computer ) माना जाता। है जिसे 1951 में अमेरिकी जनगणना के लिए प्रयोग किया गया था।

दूसरी पीढ़ी (1956-1963) :- ट्रांजिस्टर का प्रयोग
१९४७ में ट्रांजिस्टर की खोज के साथ ही कंप्यूटर युग में एक क्रांति गयी। अब कंप्यूटर में वेक्यूम ट्यूब के स्थान पर ट्रांजिस्टर का प्रयोग किया जाने लगा। ट्रांजिस्टर का आकर वेक्यूम ट्यूब की अपेक्षा बहुत ही छोटा होता था। जिसके कारण ये काम स्थान घेरते थे। ये वेक्यूम ट्यूब की तुलना में सस्ते होते थे। और ट्रांजिस्टर की कार्य क्षमता भी अधिक थी। ये कम गर्मी पैदा करते थे। इनके प्रयोग से कंप्यूटर का आकर प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर की तुलना में बहुत छोटा हो गया था। इन कंप्यूटर को चलने के लिए कम बिजली की आवश्यकता होती थी। ये कंप्यूटर प्रथम पीढ़ी के मुकाबले अधिक तेज थे। इन कंप्यूटरो में मेमोरी के लिए मेग्नेटिक ड्रम के स्थान पर अब मेग्नेटिक कोर का प्रयोग किया गया था। कंप्यूटर्स में सेकंडरी स्टोरेज के लिए पंचकार्ड के स्थान पर मेग्नेटिक टेप और डिस्क का प्रयोग किया जाने लगा था। इस पीढ़ी में FORTRAN, COBOL जैसी High Level Language का अविष्कार हुआ इन Lenguages में English के अक्षरो का प्रयोग किया गया था।


तीसरी पीढ़ी (1964-1971):- एकीकृत परिपथों (Integrated Circuit)
एकीकृत परिपथ (Integrated Circuit) या I.C.  के विकास के साथ ही आधुनिक कंप्यूटर की तीसरी पीढ़ी का जन्म हुआ। इन कंप्यूटर्स में अब ट्रांजिस्टरों का स्थान इंटीग्रेटिड सर्किट (I.C.) ने ले लिया था। I.C. बहुत सारे ट्रांजिस्टरों, रजिस्टरों और केपिस्टरो का संग्रहित रूप होता है जिसमे बहुत सरे रांजिस्टरों, रजिस्टरों और केपिस्टरो एकत्र करके एक सूक्ष्म डिवाइस का निर्माण किया जाता है। I.C. सिलिकॉन नामक पदार्थ से बनायीं जाती है इसमें लोहा, एल्युमीनियम , पोटेशियम जैसे पदार्थ होते है जो इसके कार्यछमता को कई गुना बढ़ा देते है।   I.C. के प्रयोग से आधुनिक कंप्यूटर एक कमरे से निकलकर अब एक टेबल पर आ गया था।  अर्थात कंप्यूटर का रूप छोटा हो गया था। इस पीढ़ी के कंप्यूटर्स में अब ऑपरेटिंग सिस्टम का प्रयोग किया जाने लगा था। जिसके कारण कंप्यूटर अधिक तेज हो गया और इसके आंतरिक कार्य स्वचालित हो गये।
इसके साथ ही हाई लेवल लेंगुएज में अब नयी नयी भाषाओ का विकास होने लगा जैसे कि BASIC जिसका पूरा नाम (Beginners All Purpose Symbolic Instruction Code). था। इस पीढ़ी में ही मिनी कंप्यूटर का भी विकास हुआ जो पुराने कंप्यूटर के बहुत छोटा था। इन कंप्यूटर्स में डाक्यूमेंट्स बनाना और सेव करना बहुत आसान हो गया था।

  
चौथी पीढ़ी - (1971 से अब तक) - वर्तमान: माइक्रोप्रोसेसरों

सबसे पहले माइक्रोप्रोसेसर का आविष्कार १९७० में हुआ था। माइक्रोप्रोसेसर के निर्माण के  साथ ही कंप्यूटर युग में एक बहुत बड़ा क्रांतिकारी बदलाव हुआ अब I.C. का स्थान माइक्रोप्रोसेसर हे ले लिया था। माइक्रोप्रोसेसर जिसे Large Scale Integrated Circuit के नाम  दिया गया माइक्रोप्रोसेसर में एक छोटी सी चिप में लाखो ट्रांजिस्टरों को सूक्ष्म रूप से समाहित किया गया लाखो ट्रांजिस्टरों से निर्मित इस चिप को ही माइक्रोप्रोसेसर नाम दिया गया। माइक्रोप्रोसेसर के प्रयोग से निर्मित कंप्यूटर को माइक्रो कंप्यूटर कहा जाने लगा था। दुनिया का सबसे पहला माइक्रो कम्प्यूटर MITS नाम की प्रसिद्ध कंपनी ने बनाया था।
इंटीग्रेटेड सर्किट I.C. की खोज से ही आगे चलकर माइक्रोप्रोसेसर के आविष्कार का रास्ता साफ हुआ। माइक्रोप्रोसेसर के आविष्कार  से पहले C.P.U. अलग-अलग कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को जोड़कर बनाए जाते थे।
आज दुनिया में दो बड़ी माइक्रोप्रोसेसर बनाने वाली कंपनिया Intel और AMD है। 
इस पीढ़ी में अब कोर मेमोरी  स्थान  सेमीकंडक्टर पदार्थ से बानी मेमोरी का प्रयोग किया जाने लगा। जो आकर में बहुत छोटी और इसके गति बहुत तेज होती थी।  इस पीढ़ी में अब डेटाबेस कार्य करने के लिए सरल सॉफ्टवेयर का निर्माण आरम्भ हो गया था। जैसे :- स्प्रेडशीट आदि।


पांचवीं पीढ़ी - (वर्तमान) :- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस



पांचवीं पीढ़ी के कंप्यूटर बहुत ही विकसित और कृत्रिम बुद्धि (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ) टेक्नोलॉजी पर आधारित है। इस जनरेशन के कम्प्यूटर्स में खुद  की क्षमता विकसित की जा रही है। अब कम्प्यूटर सभी प्रकार के क्षेत्र में काम करने के लिए विकसित किया जा रहा है। आज के कम्प्यूटरो को सूचनाओ के आदान प्रदान के लिए इन्टरनेट केमाध्यम से नेटवर्को से जोड़ा जा रहा है।  आज कंप्यूटर का आकार दिन प्रतिदिन छोटो होता जा रहा है।  आज कम्प्यूटर टेबल से उठकर इन्सान की हथेली पर आ गया है।  और कंप्यूटर के आकारो के नाम पर कॉम्प्यूटर को नाम दिए जा रहे है। जैसे - डेस्क टॉप, लैप टॉप, पाम टॉप आदि। 
आज कुछ कंप्यूटर विज्ञानं की शाखाए मनुष्य की तरह व्यव्हार करने वाले कम्प्यूटर्स का निर्माण कर रही है।  जिन्हें रोबोट कहाँ जाता है।
मल्टीमीडिया  टेक्नोलॉजी का निर्माण भी  पीढ़ी में हुआ जिसमे मुख्य रूप से चित्र (Graphics), ध्वनि (Sound), तथा एनिमेशन आदि है। 

गूगल अर्थ क्या है (Google Earth)


क्या आप गूगल अर्थ के बारे में जानते है अगर नही तो आज मै आपको गूगल अर्थ (Google Earth ) के बारे में बताऊंगा। "Google Earth" Google की एक बहुत ही प्रसिद्ध सेवा है जो पूरी दुनिया में प्रयोग की जाती है Google Earth के माध्यम से आप पूरी दुनिया में किसी भी अपनी आवस्यकता के अनुसार किसी भी स्थान को खोज सकते है और किसकी मुख्य स्थान की फेमस ईमारत या पहाड़ या टॉवर का 3D चित्र भी देख सकते है मान लीजिये आप दुनिया के किसी भी कोने में रहते है आपको ताजमहल किस जगह है ये देखना है और उसकी 3D आकृति भी देखनी है तो आप गूगल अर्थ में Tajmahal Agra India लिखना होगा आपको ताजमहल की लोकेशन और उसकी 3D आकृति मिल जाएगी। गूगल अर्थ के द्वारा आप २ स्थानों की दुरी को भी आसानी से नाप सकते है और किसी स्थान पर जाने के लिए रुट को भी आसानी से सर्च कर सकते है Google Earth आपको विभिन पतों को खोजने में सहायता करता है
Google Earth को आप गूगल में सर्च करके डाउनलोड कर सकते है 


विचित्र पहेलियाँ भाग -1

vichitr paheliya, nayi paheliya, paheliya, meri paheli, paheli ka jawab, paheli with answer
दोस्तों आज हम कुछ ऐसी पहेलियों के बारे में बात करेगे जो हमारे देश में काफी प्राचीन समय से चली आ रही है और जिन्हें हमारे बुजुर्ग पूछते है में आज आपको बताऊंगा की इन पहेलियों के उत्तर आप आसानी से कैसे दे सकते है तो चलो सुरु करते है निचे कुछ पहेलिया दी गयी है और उनके उत्तर भी दिए गए है.


पहेली-1  : प्यार मैं  करूँ तो घर को चमका दूँ ,
                   और वार करूँ तो  ले लूँ  मैं जान,
                   कभी जंगल में मंगल कर  दूँ ,
                   और कभी कर दूँ मैं शहर वीरान,
                   Pyar karu to Ghar chamka du
                   var Karu to le lu me jaan
                   Jangal mai main mangal kar du,
                   Kabhi kar du main shahr viran.
Ans- बिजली

पहेली-2  : कपड़े उतरवाएँ और पंखा चलवाए,
                   फिर कहती ठंडा पीने को,
                   अभी-अभी तो मैं  नहा के आया,
                   फिर से कहती नहाने को.
                   Kapde utarvaye Pankha chalvaye, khti thande pani ko
                   Abhi Abhi to nha ke aya, Fir se khti nhane ko.
Ans - गर्मी

पहेली-3 :   ना किसी से झगडा है ना है लढाई ,
                    फिर भी होती सदा मेरी पिटाई
                    बताओ कौन हूँ मैं?
                    Na kisi se jhagda hai na hai ladai
                    fir bhi hoti sada mari pitai
                    Batao kon hu main.
Ans - ढोल

पहेली-4 :  जो जाकर फिर ना वापस आये और वो  जाता हुआ भी नजर ना आये,
                   हर जगह होती उसी की चर्चा,  वह अति बलवान कहलाये, बताओ क्या है?
                   Jo jakar for na vapas aaye or vo jata hua bhi najar na aaye,
                   har jagha hoti usi ki charcha, vah ati balwan khlaye, batao kya hai.
Ans - समय

पहेली-5  : गर्मी में जिससे है हम घबराते, जाड़े में है हम उसी को खाते,
                   उससे है प्रत्येक चीज चमकती दुनिया भी उससे खूब दमकती.
                   बताओ कौन है वह?
                   Garmi mai jisse hai hum ghabrate jado me hai hum usi ko khate,
                   usse hai har chij chamakti duniya bhi usse khub damakti 
Ans - धुप

पहेली-6  :  धूप  लगे तो पैदा हो जाये और छाँह लगे मर जाये
                    और करे परिश्रम तो भी उपजे पर हवा लगे मर जाये
                    Dhup lage to peda ho jaye or chah lage to mar jaye
                    Or kare parishram to bhi upje par hawa lage to mar jaye.
Ans - पसीना

पहेली-7  : ऐसी कौन  सी चीज़ है जिसे जो इंसान खरीदता है, वह इंसान उसे कभी नही पहनता है,
                  और जो इंसान उसे चीज को पहनता है, वो इंसान उससे कभी खरीदता नहीं है
                   Esi kon si chij hai jise jo insan kharidta hai vo insan use kabhi pahanta nahi hai.
                   or jo insan use phanta hai vo use kabhi kharidta nahi hai.
Ans - कफन

पहेली-8  : वो कौन सा काम है जो एक आदमी अपनी पूरी ज़िन्दगी में बस एक  बार करता है
                   लेकिन उसी काम को एक  औरत प्रतिदिन करती है.
                   Vo kon sa kaam hai jo ek aadmi aapni puri jindagi mai ek hi bar karta hai.
                   or us kaam ko ek orat orj karti hai.
Ans - मांग भरना


पहेली-9  : वो कौन सी सब्जी है जिसका पहला अक्षर काट दो तो एक कीमती चीज़ का नाम
                   और अगर अंतिम अक्षर काट दो  तो  एक स्वीट डिश का नाम
                   तथा दोनों अक्षर काट दो तो एक लड़की का नाम बनता है?
                  Vo kon si sabji hai jiska pahala akshar kat do to ek kimti chij ka naam
                  or agar antim akshar kat do to ek sweet dish ka naam 
                  tatha dono kat do to ek ladkhi ka naam banta hai.
Ans - खीरा  (Kheera )


पहेली-10  : एक पिता ने अपने बच्चे को एक गिफ्ट देते हुए कहा,  कि  इसमें एक ऐसी चीज है,
                     जब तुझे प्यास लगे तो इसे पी लेना, और जब तुझे भूख लगे खा लेना और जब तुझे सर्दी लगे तो
                     इसे जला लेन तो बताओ ऐसे वो  कौन सी चीज है जो  हमारे इतने काम आयगी.
                    Ek pita ne aapne bachche ko ek gift dete hue kha ki isme esi chij hai,
                    jab pyas lage to pi lena, jab bhukh lage to kha lena or jab sardi lage to
                    ise jala lena to batao esi vo kon si chij hai jo hamare itna kaam aa sakti hai.
Ans - नारयल


पहेली-11  :  वो कौन सी चीज है जिसे जितना खिचो तो वो उतनी ही छोटी होती chali जाती है
                      Esi kon si chij hai jise jitna khicho to vo utni hi choti hoti chali jati hai.
Ans - सिगरट

पहेली-12  : एक आदमी अपनी पुरी जिन्दगी मे सबसे ज्यादा क्या सुनता है
                     Ek aadmi aapni puri jindagi mai kya sunta hai.
Ans - अपना नाम

पहेली-13 : मैंने एक मरे हुए कुत्ते को भागते हुए देखा है तो बताओ कैसे?
Ans - मै भाग रहा था और मेने भागते समय एक मरे हुए कुत्ते को देखा

मेरठ (Meerut)

इतिहास:
 मेरठ भारत  का प्रसिद्ध नगर हे मेरठ प्राचीन काल से ही  विख्यात रहा हे यहाँ से २३ मील उत्तर-पूर्व में स्थित एक स्थल विदुर का टीला की पुरातात्विक विभाग द्वारा की गयी खुदाई से ज्ञात हुआ था कि यह शहर प्राचीन नगर हस्तिनापुर का अवशेष है, जो महाभारत काल मे कौरवो के राज्य की राजधानी थी। जो काफी टाइम बहुत पहले गंगा नदी की बाढ़ में बह गयी थी| तथा एक अन्य प्रमाण के अनुसार रावण के नाम पर यहाँ का नाम मयराष्ट्र पड़ा था , जैसा की यह रामायण में वर्णित भी है। रामायण के राक्षस राज रावण की पत्नी मंदोदरी मेरठ की रहने वाली थी मंदोदरी के पिता का नाम मय दानव था , जो राक्षसों के वास्तुकार भी कहलाते थे मय दानव के नाम पर इसका प्राचीन नाम मयराष्ट्र था, जो समय के साथ-साथ  बिगडकर मेरठ हो गया  अब  जिसे मेरठ के नाम से ही जाना जाता है छठी शताब्दी के बालु पत्थर से बने अशोक स्तंभ का एक भाग जिस पर अशोक ने ब्राह्मी लिपि मे राज्यादेश खुदवाये थे, यह  मूल रूप से मेरठ मे मिला था और जो अब ब्रिटिश संग्राहलय मे रखा है। 
मेरठ जिला  मौर्य सम्राट अशोक के काल में (जोकि 273 इ.पु. से 232 इ.पु. तक था ) बौद्ध धर्म का केन्द्र रहा था , जिसके निर्माणों के अवशेष जामा मस्जि़द के पास  वर्तमान में मिले हैं, दिल्ली के बड़ा हिन्दू राव अस्पताल, दिल्ली विश्वविद्यालय के निकट स्थान पर अशोक स्तंभ, फिरोज़ शाह तुगलक (1351 – 1388) द्वारा दिल्ली लाया गया था। बाद में यह स्तम्भ 1713 में, एक बम धमाके में ध्वंस हो गया था , एवं इसे 1867 में जीर्णोद्धार किया गया था | बाद में मुगल सम्राट अकबर के शासन काल (1556-1605) में  यहां तांबे के सिक्कों की टकसाल थी|  ११ वी शताब्दी में मेरठ  जिले का दक्षिण-पश्चिमी भाग, बुलंदशहर के दोर – राजा हरदत्त द्वारा शासित  हुआ करता था, जिसने एक किला बनवाया था, उस किले का आइन-ए-अकबरी में उल्लेख भी है,  बाद में वह राजा  महमूद गज़नी द्वारा 1018 में पराजित हुआ| मेरठ  शहर पर पहला बड़ा आक्रमण मुहम्मद गोरी द्वारा 1192 में किया गया था , जब उसके जनरल कुतुबुद्दीन ऐबक ने शहर पर हमला कर के शहर के ज्यादातर हिन्दू मंदिरों को मस्जिदों में बदल दिया था | लेकिन इससे भी बुरा शहर का भाग्य अभी आगे खड़ा था, जब तैमूर लंग ने 1398 में आक्रमण किया था, जिसको राजपूतों ने कड़ी टक्कर दी थी | यह आक्रमण लोनी के किले पर हुआ था , जहां उन्होंने दिल्ली के सुल्तान महमूद तुगलक के साथ भी युद्ध किया परंतु अन्त में वे सब हार गये और  बाद में सभी एक लाख युद्ध बंदी मौत के घाट उतार दिये गये थे| तैमूर लंग के अपने ये  सभी उल्लेख तुज़ुक-ए-तैमूरी में मिलते है| उसके बाद, वह दिल्ली पर आक्रमण करने आगे बढ़ गया जहां तैमूर लंग ने  फिर स्थानीय लोगों का हत्याकाण्ड किया था और  वापस मेरठ पर हमला बोला दिया, जहां तब एक अफगन मुख्य का शासन के रूप में था| उसने नगर को दो दिनों में कब्ज़ा किया, जिसमें बहुत बड़ा विनाश सम्मिलित था

प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 
मेरठ का नाम  ईस्ट इंडिया कंपनी के विरुद्ध 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिये भी प्रसिद्ध रहा  है| भारत प्रसिद्ध का नारा "दिल्ली चलो" पहली बार मेरठ  से दिया गया था| मेरठ  की छावनी  वह स्थान है, जहां हिन्दू तथा  मुस्लिम सैनिकों को बन्दूकें दी गयीं तथा  जिनमें बंदूको में जानवरों की खाल से बनी गोलियां डालनी पड़तीं थीं, जिन गोलियों  मुंह से खोलना पड़ता था| जिससे  हिन्दुओं और  मुसलमानों की धार्मिक भावना आहत हुई थी , क्योंकि वह जानवर की चर्बी गाय व सूअर की होती थी| गाय को  हिन्दुओं के लिये पवित्र माना जाता है, और सूअर मुसलमानों के लिये अछूत पशु माना जाता है| मेरठ तभी से अन्तर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि में आया था  जब 1857 का विद्रोह हुआ था | २४ अप्रैल,१८५७ को; तृतीय अश्वारोही सेना की 90 में से 85 टुकड़ियों ने गोलियों को छूने  से मना कर दिया था | उन्हें कोर्ट-मार्शल के बाद 10  वर्ष का कारावस मिला| इसके विद्रोह से  ही, ब्रिटिश गुलामी से मुक्ति पाने की पहली चिंगारी यहाँ  भड़क उठी थी,  इस संग्राम में शहरी जनता का पूरा समर्थन मिला| मेरठ में ही मेरठ षड्यंत्र का मामला मार्च १९२९ में हुआ था जो मेरठ विद्रोह के रूप में प्रसिद्ध है | इसमें कई व्यापार संघों को और  ३  अंग्रेज़ों को गिरफ्तार किया गया था जो भारतीय रेलवे की हड़ताल कराने वालो में सामिल थे| इस पर इंग्लैंड का डायरेक्ट ध्यान गया, जिसे वहां के प्रसिद्ध मैन्चेस्ट्र स्ट्रीट थियेट्स्र ग्रुप ने अपने “रड मैगाफोन” नामक नाटक में दिखाया, जिसमें वहाँ के कोलोनाइज़ेशन व औद्योगिकरण के हानिकारक प्रभावो को दिखाया गया था| 

मेरठ का पौराणिक महत्व:
मेरठ में ही महाभारत में वर्णित लाक्षागृह जिसका निर्माण पांडवों को जीवित जलाने हेतु दुर्योधन ने करवाया था, यहीं पास में बरनावा  (प्राचीनकाल वार्णावत ) में स्थित था। यह स्थान मेरठ-बड़ौत मार्ग पर पड़ता है।
रामायण में वर्णित श्रवण कुमार जो आपने बूढ़े माता पिता को तीर्थ यात्रा कराने ले जा रहा था। जिनको श्रवण कुमार ने  कावर  में बिठाया हुआ था। इसी स्थान पर आकर , श्रवण कुमार ने प्यास के मारे, उन्हें जमीन पर रखा था , व बर्तन लेकर सरोवर से जल लेने गया था । उसके बर्तन की पानी में आवाज को सुनकर शिकार  के लिए निकले महाराजा दशरथ ने उसे जानवर समझ कर तीर चला कर मार दिया था। उसके दुःख में ही उसके माता पिता ने भी तड़प-तड़प कर प्राण त्याग  दिए थे लेकिन  मरते हुए, उन्होंने दशरथ को शाप दिया कि जिस प्रकार हम अपने पुत्र वियोग में मर रहे हैं, उसी प्रकार तुम भी अपने पुत्र के वियोग में प्राण त्यागोगे और बाद में वैसा ही हुआ था मेरठ को  रावण की ससुराल भी माना जाता है।
नौचंदी मेला 
मेरठ का प्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक नौचंदी मेला  जो हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है मेरठ में ही है। हजरत बालेमियां की दरगाह और  नवचण्डी देवी का मंदिर जिसे नौचन्दी देवी के नाम से जानते है एक दूसरे के निकट में  ही स्थित हैं। मेरठ का ये  मेला चैत्र मास के नवरात्रि त्यौहार से एक सप्ताह पहले आरम्भ हो जाता है और  होली के एक सप्ताह बाद तक चलता है ये मेला एक माह चलता है । 

पर्यटन स्थल 
  1. पांडवो का किला - यह किला मेरठ के बरनावा क्षेत्र में स्थित है। महाभारत से सम्बंधित इस किले में अनेक प्राचीन मूर्तियां देखने को मिलती हैं। कहा जाता है कि यह किला पांडवों ने बनवाया था। और  दुर्योधन ने पांडवों को उनकी मां साथ यहां जिन्दा जलाने का षडयंत्र रचा था लेकिन वे एक भूतिगत सुरंग के माध्यम से बच निकले थे। 
  2. मेरठ की शहीद स्मारक - ये स्मारक मेरठ के उन बहादुर शहीदों को समर्पित है, जिन्होंने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति  दी थी। यह स्मारक संगमरमर से बना है इसकी उचाई 30 मीटर है। 
  3. शाहपीर का मकबरा - यह मकबरा मुगलकालीन ईमारत है। ये मकबरा मेरठ के ओल्ड शाहपुर गेट के निकट स्थित है। मकबरे के निकट ही लोकप्रिय सूरज कुंड स्थित है। 
  4. हस्तिनापुर तीर्थ - हस्तिनापुर तीर्थ स्थल जैनियों के लिए एक पवित्र तीर्थ स्थान माना जाता है। यहां का एक  मंदिर जैन तीर्थंकर शांतिनाथ को समर्पित है। ऐतिहासिक दृष्टि से ये स्थान जैनियों के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि जैनियों के तीसरे तीर्थंकर आदिनाथ ने 400 दिन का उपवास रखा था। यहाँ पर इस मंदिर का संचालन  हस्तिनापुर जैन श्वेतांबर तीर्थ समिति द्वारा किया जाता है।
  5. रोमन कैथोलिक चर्च - मेरठ के सरधाना में  स्थित रोमन कैथोलिक चर्च अपनी खूबसूरत कारीगरी के लिए प्रसिद्ध  है। ये चर्च मैरी को समर्पित है,  इस चर्च का डिजाइन इटालिक वास्तुकार एंथनी रघेलिनी के  द्वारा तैयार किया था। सन 1822 में इस चर्च को बनवाने की लागत 0.5 मिलियन रूपये  आयी थी। इस भवन की  निर्माण साम्रगी जुटाने के लिए यहाँ  आसपास खुदाई की गई थी। ये खुदाई वाला हिस्सा आगे चलकर दो झीलों में तब्दील हो गया।
  6. सेन्ट जॉन चर्च - मेरठ में 1819 में इस चर्च को ईस्ट इंडिया कंपनी की ओर से चेपलिन रेव हेनरी फिशर ने स्थापित करवाया था। सेन्ट जॉन चर्च चर्च की गणना उत्तर भारत के सबसे प्राचीन चर्चो में की जाती है। मेरठ के इस विशाल चर्च में दस हजार लोगों के बैठने के लिए स्थान है। 
  7. नंगली तीर्थ - यहाँ का पवित्र नंगली तीर्थ मेरठ जिले के नंगली गांव में स्थित है। नंगली का यह तीर्थ स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज की समाधि की वजह से बहुत लोकप्रिय है। मुख्य सड़क से तीर्थ तक  यहाँ 84 मोड़ हैं जो चौरासी लाख योनियों के मुक्ति के प्रतीक मने जाते हैं। भारत के विविध हिस्सों से श्रद्धालु यहां आते हैं।
  8. सूरज कुंड -मेरठ में इस पवित्र कुंड का निर्माण एक धनी व्यापारी लावार जवाहर लाल के द्वारा 1714 ई. में करवाया गया था। प्रारंभ में मेरठ के अबु नाला से इस कुंड को जल प्राप्त हुआ करता था। लेकिन वर्तमान में गंग नहर से इसे जल प्राप्त होता है। सूरज कुंड के आस-पास में अनेक मंदिर बने हुए हैं जिनमें मंदिरो में मनसा देवी मंदिर और बाबा मनोहर नाथ का  मंदिर प्रमुख हैं। यहाँ ये मंदिर शाहजहां के काल में बने थे। 
  9. जामा मस्जिद - मेरठ की कोतवाली के निकट स्थित इस मस्जिद का यह निर्माण 11वीं शताब्दी में करवाया गया था।
  10. द्रोपदी की रसोई - मेरठ में द्रोपदी की रसोई हस्तिनापुर में बर गंगा नदी के तट पर स्थित है। ये माना जाता है कि महाभारत काल में बर गंगा नदी के तट पर द्रोपदी की रसोई थी।
  11. हस्तिनापुर अभयारण्य - मेरठ के इस अभ्यारण्य की स्थापना 1986 में की गई थी। 2073 वर्ग किमी. के क्षेत्र में फैले इस अभ्यारण्य में अनेक अनेक प्रकार के पशु और जीवो जैसे सांभर, चीतल, जंगली बिल्ली, मृग, तेंदुआ, हैना, नीलगाय, आदि पशुओं के अलावा  पक्षियों की अनेक प्रजातियां देखने को मिलती  हैं। नंवबर से जून का समय यहां आने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। मेरठ के इस अभ्यारण्य का एक हिस्सा गाजियाबाद, बिजनौर और ज्योतिबा फुले नगर के अन्तर्गत भी आता है।

शिक्षा 
मेरठ नगर में कई  विश्वविद्यालय हैं, 
  • चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, 
  • सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, 
  • शोभित विश्वविद्यालय एवं 
  • स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय।
इसके अलावा मेरठ में कई अन्य महाविद्यालय एवं विद्यालय हैं। 

Open Program का Screen Capture बनाना

Open Program का Screen Capture  बनाने के लिए सबसे पहले उस प्रोग्राम को Open  कर लेते है जिसका Screen  Capture  करना है फिर  KeyBoard  में Print  Screen SysRq बटन को दबाते है जिससे वह Screen  Copy  हो जाती है जिसे हम आवश्यकतानुसार किसी प्रोग्राम में Paste  कर सकते है

Windows मे बिना नाम का Folder बनाना

कंप्यूटर ज्ञान में आज मैं आपको  बताऊंगा की विंडोज में बिना नाम का फोल्डर कैसे बनाया जाता है यदि यदि आप कोई फोल्डर बनाते है तो आपको उस फोल्डर का कोई न कोई नाम रखना पड़ता है जब फोल्डर बनाते है तो  डिफॉल्ट नाम "New Folder" होता है लेकिन आप  उस फोल्डर का नाम अपनी इच्छा  कुछ भी रख सकते है. लेकिन बात तब आकर रुक जाती है जब आपको उस फोल्डर का कोई नाम ही न रखना हो क्योकि बिना  नाम का फोल्डर शायद आप बना ही न पाये लेकिन लेकिन  मैं आपको एक ऐसी तरकीब बताता हु जिसके द्वारा आप एक ऐसा फोल्डर बना पायेगी जिसका कोई नाम ही नहीं होगा
Windows मे बिना नाम का Folder  बनाने का लिए windows मे Right Click  करके New  मे जाकर  Folder पर Click  करते है
Folder  का नाम Alt+255  key  के द्वारा रखते है 
मतलब फोल्डर को Rename करके उसका नाम Alt key के साथ 255 रखते है इस प्रकार बना फोल्डर बिना नाम का होगा
वास्तव में इस  फोल्डर का नाम स्पेशल करैक्टर में होता है जो करैक्टर किसी को दिखाई नहीं देता लेकिन होता है 
 
नोट:- यह Folder  Window 7  तथा Vista  मे Delete  नही होगा  लिकिन XP मे यह आसानी से delete  हो जाता हैं

Window मे Shut Down Computer Shortcut बनाना

Shut Down का Shortcut बनाने के लिए सबसे पहले Desktop  पर Right Click करके New  मे जाकर Shortcut  
पर Click करते है 

















तथा Shortcut में shutdown -s -t 00  लिखते है 













फिर Shortcut की Properties मे जाकर उसका icon  बदल लेते हैं 











इसी प्रकार Restart का भी Shortcut  बनाते है 
बस अंतर इतना है कि उसमे shutdown -s  -t  00 के स्थान पर shutdown  -r  -t   01  लिखते हैं  

Hanging Gardens of Babylon- बेबीलोन के झूलते बागीचे (इराक)

बेबीलोन के झूलते बगीचे जिन्हें हम सेमीरामीस के झूलते बाग़ भी कहते है  पूरी दुनिया में विख्यात है  जैसा की इनके नाम से ही परतीत होता है कि यह  दुनिया की ये इमारत कितनी विचित्र होगी इसे प्राचीन विश्व के सात अजूबों में से एक का स्थान प्राप्त है। यह विचित्र ईमारत प्राचीन काल में बेबीलोन में बनाया गया था जो अब इराक के अल-हिल्लह नामक स्थान के पास स्थित है. यह बगीचा यहां के राजा नबूचड्नेजार २  (Nebuchadnezzar II) के द्वारा 600 ईसा पूर्व में बनवाया गया था . यह उद्यान राजा ने अपनी पत्नी को खुश करने के लिए बनवाया था पर आज समय की विषम परिस्थितियों  ने इस विचित्र अजूबे को दफन कर दिया है. एक भूकंप कारन  ये बगीचा नष्ट हो गया था.

Great Pyramid of Gizam – गीज़ा का विशाल पिरामिड (मिस्त्र)


मिस्र के पिरामिडों का निर्माण यहाँ के राजाओ को दफ़नाने के लिए किया जाता था. इन पिरामिडों में राजाओ को दफ़नाने के लिए राजाओ के सवो के साथ खान पिने की वस्तुए और कपडे और होथियारो को भी उनके साथ दफनाया जाता था इतना ही नहीं इन राजाओ के जीवित सेवक और सेविकाओं को भी राजा के साथ उस हे पिरामिड में राजा के साथ दफनाया जाता था  वहाँ के लोगो का मनना था राजा किसी दूसरी दुनिया में जायेगे तो उनको इन सब चीजो की आवश्यकता पड़ेगी इन राजाओ के शवो को मम्मी कहाँ जाता था. 
मिस्त्र में निर्मित  इन पिरामडों की रचना एक पहेली जैसी  है. यहाँ पर  राजा फाराओह खुफु (Pharaoh Khufu) की याद में बनाये गए  पिरामिड की खासियत यह है कि इस पिरामिड के  पत्थरों को पानी में काट कर, एक के ऊपर एक पत्थर को रख कर बनाया गया है. पिरामिड के पत्थरों को कुछ इस तरह से एक दूसरे के पुर रखा गया है कि इसके बीच में एक बाल घुसने की भी जगह नहीं है. यह पिरामिड अब तक समय की मार झेलता बिना छती हुआ खड़े हुए है. गणित का इस्तेमाल करते हुए  शिल्पकारो ने इस रचनाओ को आकार दिया था.

चिचेन इत्जा (Chichen Itza)

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चिचेन इत्ज़ा दुनिया के अजूबो में  से एक है जो अमेरिक के मैक्सिको में स्थित है। और मेक्सिको में बसी यह  चिचेन इत्जा नाम की यह इमारत दुनिया  में मैक्सिको की माया सभ्यता की गौरवपूर्ण काल की कहानी को बयान करती है यह माया सभ्यता द्वारा बसाया गया शहर था। और इसे माया सभ्यता का प्रमुख केन्द्र मन जाता है। 
उस समय के अति कुशल कारीगरों की मेहनत की वजह से ही इस ईमारत का निर्माण हो सका चिचेन इत्ज़ा में  शहर के बीचो-बीच कुकुलकन का मंदिर है ये मन्दिर 79 फीट उचाई तक बना हुआ है। इस मन्दिर की चार दिशाओं में 91 सीढ़ियां है।  और प्रत्येक सीढ़ी साल के एक दिन का प्रतीक है। और 365 वां दिन ऊपर बने चबूतरे को माना जाता है।

माचू पिच्चू (Machu Picchu):

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अगर विश्व के अजूबो की बात की जाये तो आपको अनेक अजूबो के बारे में पता होगा जो पूरी दुनिया में फैले हुए है जिनमे से कुछ अजूबे बहुत ही प्राचीन वे आश्चर्यचकित करने वाले है। इनमे से एक अजूबा इस ही है । जिसका नाम है माचू पिचू यह एक शहर है जो बहुत पुराना है। और दुनिया के अजूबो में से एक  15वीं शताब्दी में सतह से लगभग 2430 मीटर ऊपर एक विशाल पहाड़ी के ऊपर एक शहर को बसना और उस शहर में रहना अपने आप में अजूबा ही है। यह शहर दक्षिण अमरीका में एंडीज पर्वतों के बीच बसा ‘माचू पिच्चू शहर’ अमेरिका की पुरानी इंका सभ्यता का सबसे बड़ा उदाहरण है। यह माना जाता है कि कभी यह नगरी संपन्न थी। यहां रहने वाले लोग बहुत संपन्न थे । ये शहर आपने आप में एक संपूर्ण शहर था। यहाँ पर उस समय के अनुसार सभी सुविधाएं उपलब्ध थी। ये मना जाता है कि बहुत समय पहले यहाँ पर स्पेन ने आक्रमण किया था । और ये आक्रमणकारी अपने साथ स्पेन से  चेचक जैसी जानलेवा बीमारी यहां लेकर  आये थे । जिस बीमारी के प्रकोप से यह शहर पूरी तरह तबाह हो गया। इस शहर के प्राचीन अवशेष आज भी एंडीज पर्वत पर उपलब्ध है। ये माचू पिचू दुनिया के अजूबो में से एक है। 

रोम का कॉलोसियम (Colosseum of Rome)

इटली के रोम शहर में स्थित यह एक विशाल एलिप्टिकल एम्फीथिएटर है। जो विश्व के अजूबो में गिना जाता है। ये कॉलोसियम रोम के मध्य में स्थित सभागार का खंडहर है। ये ईमारत रोम की स्थापत्य कला और इंजीनयरिंग का उत्तम नमूना है। इसका निर्माण लगभग सत्तरवी सदी में सम्राट वेस्पेसियन (Vespasian) ने करवाया था। इस स्टेडियम में लगभग 50,000 तक लोग एक साथ बैठकर जंगली जानवरों और गुलामों  के बीच खूनी लड़ाइयों का खेल देखते थे। इस के आलावा इस स्टेडियम में वार्षिक  सांस्कृतिक कार्यक्रमो का आयोजन भी होता था। रोम के इस कोलोसियम की नकल करना आज भी नामुमकिन है। ये स्टेडियम दुनिया के इंजीनियरों के लिएआज भी एक पहेली बना हुआ है। 

जार्डन का ‘पेट्रा’ (Petra)

ऐतिहासिक शहर पेट्रा अपनी विचित्र वास्तुकला के लिए दुनिया के सात अजूबों में शामिल है. यहां तरह तरह की इमारतें है जो लाल बलुआ पत्थर से बनी हैं और सब पर बेहतरीन नक्काशी की गई है. इसमें 138 फुट ऊंचा मंदिर, नहरें, पानी के तालाब तथा खुला स्टेडियम है. ‘पेट्रा’ जॉर्डन के लिए विशेष महत्व रखता है क्यूंकि यह उसकी कमाई का जरिया है. ‘पेट्रा’ पर्यटन के लिहाज से जॉर्डन के लिए सोने के अंडे देने वाली मुर्गी है.

चीन की दीवार (Great Wall of China)

चीन ने अपनी सुस्रक्षा के लिए अपनी सभी सीमाओं को एक दीवार से घेर दिया था जिसे चीन की दीवार कहते हैं. यह दीवार 5वीं सदी ईसा पूर्व में बननी चालू हुई थी और 16 वीं सदी तक बनती रही. यह चीन की उत्तरी सीमा पर बनाई गयी थी ताकि मंगोल आक्रमणकारियों को चीन के अंदर आने से रोका जा सके. यह संसार की सबसे लम्बी मानव निर्मित रचना है जो लगभग 4000 मील (6,400 किलोमीटर) तक फैली है. इसकी सबसे ज्यादा ऊंचाई 35 फुट है जो इसे सुरक्षा देती है. यह दीवार इतनी चौड़ी है कि इस पर 5 घुड़सवार या 10 पैदल सैनिक गश्त लगा सकते हैं.

क्राइस्ट द रिडीमर (Christ the Redeemer)


दुनिया भर में अनेक अजूबे  है इन अजूबो में एक है ब्राजील की रियो डी जनेरियो में पहाड़ी पर स्थित 130 मीटर ऊँची क्राइस्ट दी रिडीमर की मूर्ति या प्रतिमा क्राइस्ट दी रिडीमर का मतलब है उद्धार करने वाले ईसा मसीह ये दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मूर्ति है। इस मूर्ति को कंक्रीट और पत्थर से बनाया गया है। ये मूर्ति ईसा मसीह की दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा है। इस मूर्ति का निर्माण 1922 से 1931 के बीच हुआ था। 

पूर्वी एशियाई शिखर सम्मेलन



पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन पुर्वी एशियाई क्षेत्रो वे देशो का साझा मंच है। इसमें एशिया के १० सदस्य राष्ट्रों  की सनाख्य लगभग १० है।  लेकिन वर्तमान में इसमें १८ देश सम्मिलित है ( फिलीपींस, रूस, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, वियतनाम, इंडोनेशिया, जापान, लाओस, मलेशिया, ब्रुनेई, कम्बोडिया, न्यूज़ीलैंड, म्यांमार, थाईलैंड ).सन २०११ में हुए छठे सम्मेलन में संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस को भी इसमें सम्मिलित कर लिया गया था।


पहला : (14 दिसंबर 2005)
स्थान: मलेशिया (कुआला लम्पुर),   नेता - अब्दुल्ला अहमद बदावी
दूसरा : (15 जनवरी 2007)
स्थान : फिलीपींस (सीबू सिटी),    नेता - ग्लोरिया मकपागल -अरोयो

तीसरा : (21 नवंबर 2007)
स्थान: सिंगापुर,   नेता - ली सीन लूंग

चौथा : (25 अक्टूबर 2009)
स्थान: थाईलैंड (च ऍम & हुआ हिन्),  नेता - अभिसित वेज्जाजीवा

पाँचवाँ : (30 अक्टूबर 2010)
स्थान: वियतनाम (हनोई),  नेता - गुएन तान डुंग

छठा : (18-19 नवंबर 2011)
स्थान: इंडोनेशिया (बाली),  नेता - सुसिलो बाम्बांग युधोयोनो

सातवाँ : (19-20 नवंबर 2012
)
स्थान: कंबोडिया (नोम पेन्ह),  नेता - हुन सेन

आठवाँ : (9-10 अक्टूबर 2013) 
स्थान: ब्रुनेई (बंदर सेरी बेगावान), नेता - हस्सनल बोल्किअह

नवाँ : (12-13 नवंबर 2014) 
स्थान: बर्मा (म्यांमार ) (नेपयीदाव ),  नेता - थीन सीन

दसवाँ : (21-22 नवंबर 2015)
स्थान: मलेशिया (कुआला लम्पुर),  नेता - नज़ीब रजक

पैन कार्ड: लाभ


पैन कार्ड भी निम्न लाभ प्रदान करता है:






  1. पैन, अद्वितीय, स्थायी, और राष्ट्रीय है और एक आईडी प्रूफ के रूप में कार्य करता है.
  2. राज्यों के बीच भी पता बदलने के लिए, से अप्रभावित है.
  3. पैन किसी भी बैंक में 50 रुपए, 000 या अधिक जमा करने के लिए करना चाहिए है.
  4. ऑपरेटिंग डीमैट खातों के लिए या एक बैंक खाता खोलने के लिए चाहिए.
  5. सेलुलर कनेक्शन सहित एक टेलीफोन कनेक्शन के लिए आवेदन.
  6. एक क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन.
  7. बैंकरों चेक, बैंक ड्राफ्ट या एक ही दिन पर भुगतान आदेश खरीदने के लिए 50 रुपए, 000 की एक न्यूनतम के नकद भुगतान के लिए.
  8. रु .5 लाख या उससे अधिक के लायक अचल संपत्ति बेचने या खरीदने. यदि सह - स्वामित्व वाली संपत्ति है, दोनों स्वामियों के लिए पैन का उल्लेख किया जाना चाहिए.
  9. दो पहिया वाहनों की तुलना में अन्य मोटर वाहनों को बेचने या खरीदने. यह भी केवल कारखानों या अन्य संलग्न परिसर और है कि पटरियों पर चलने वाले वाहनों में इस्तेमाल किया वाहनों शामिल नहीं है.
  10. बिक्री या शेयरों, बांडों, डेरिवेटिव, डिबेंचर 1 लाख से अधिक या अन्य प्रतिभूतियों की खरीद.
  11. एक निवेश शेयर, म्यूचुअल फंड या डाकघर बचत में 50 रुपए, 000 से अधिक.
  12. होटल या रेस्तरां के बिल के खिलाफ 25, 000 का एक न्यूनतम भुगतान.
  13. एक माता पिता या अभिभावक (जो क्लब आय होगी) के पैन मामले में एक छोटी सी के लिए एक समय जमा या बैंक खाते का इरादा आवश्यक है

स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी (The Statue of Liberty)


स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी (The Statue of Liberty) न्यूयार्क हार्बल में स्थापित एक विशाल स्टेचू है। स्टेटचू ऑफ़ लिबर्टी हरे रंग की सुन्दर महिला की ताँबे की यह स्टेचयू अमेरिका को फ़्रांस से तोहफे के रूप अमेरिकन क्रांति के समय में प्राप्त हुई थी। ताँबे की १५१ फिट लंबी ये मूर्ति ( चौकी और आधारशिला को मिलाकर ३०५ फिट ) एक विशाल स्टेचू है। यह स्टेचू 350 अलग अलग टुकड़ो में फ़्रांस से सन 1885 में न्यूयार्क लायी गयी थी।  जहाँ पर इस दोबारा से रेअसेम्ब्ले करके स्थापित किया गया था। 28 अक्टूबर 1886 को इस स्टेचू को राष्ट्र को समर्पित किया गया था। 1924 ने इस संयुक्त राष्ट्र अमेरिका ने इसे राष्ट्र स्मारक घोषित किया था। २८ अक्टूबर २०११ को इस स्मारक की १२५ वी वर्षगाँठ मनाई गयी।